एक बड़ी खबर बिहार के लिए जहा बैकों ने लोगों को लोन देने से मना कर दिया है. जी हां, बिहार में बैंकों के क’र्ज देने से क’तराने की बड़ी वजह डू’बते लोन खाते हैं.

हा’लत यह है कि साख ब’चाने के लिए राज्य के बैंकों को अपनी बैलेंस शीट से 716 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डा’लने पड़े हैं.

राज्य के हर दस लोन खा’तेदारों में एक डि’फॉल्टर है हर तिमाही राज्यस्तरीय बैंकर्स कमेटी की बैठक में राज्य सरकार की ओर से बैंकों पर साख जमा अनुपात जो कि क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो में सुधार के लिए द’बाव बनाया जाता है,

जबकि बैंक डूबे कर्ज को व’सूलने के लिए बका’एदारों पर कानूनी ह’थकं’डे अपनाकर हार चुके हैं। ऋण वसूली के लिए विभिन्न बैंकों के बका’एदारों पर पांच लाख 88 हजार 538 सर्टिफिकेट केस लं’बित हैं।

मुक’दमों के फेर में बैंकों की 4,266 करोड़ की राशि फं’सी पड़ी है.



Input: jagran