PATNA : आज 21 अक्टूबर रविवार को पूरे देश में पुलिस संस्मरण दिवस मनाया जा रहा है. इस मौके पर एक सितंबर 2017 से 31 अगस्त 2018 के बीच देश में शहीद जवानों को पूरा देश याद कर रहा है. बिहार में 10 योद्धा वीर गति को प्राप्त हुए हैं. इनमें पुलिस जिला नवगछिया में हाल के बीते दिनों में कुख्यात अपराधियों से लोहा लेते हुये थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह ने अपने प्राण की आहुति दे दी थी. जिनकी शहादत को भी आज याद किया जा रहा है.
शहीद हुये दारोगा आशीष कुमार के सिमरी बख्तियापुर के सरोजा गांव पहुंचे. परिजनों से डीजीपी केएस द्विवेदी उनके घर जाकर परिजनों से मिलें और उनके गांव सरोजा स्थित सरकारी स्कूल के बच्चों को वीर पुलिसकर्मी आशीष कुमार के वीर गाथा को सुनाएं.
उन्होंने कहा कि समाज की सुरक्षा में पुलिस तत्पर रहती हैं और पुलिस सेवा शान का प्रतीक है. डीजीपी ने युवाओं से अपील किया कि पुलिस सेवा में बढ़-चढ़कर आएं और समाज की सुरक्षा में योगदान दें.परिजनों से मिलने के बाद डीजीपी के एस द्विवेदी ने मीडिया से कहा कि आशीष बहुत ही बहादुर अधिकारी थे. मैं यहाँ उनकी वीरता और उनके परिवार को सम्मान देने आया था. उनकी पत्नी को सिपाही की नौकरी मिल सकती है. मैंने उनसे आग्रह किया कि आप जॉब करें.
आशीष बहादुर थे, जिसके कारण वह दियारा क्षेत्र में रात को जाने की हिम्मत की. उनसे पहले एक सिपाही को गोली लग गई थी. वह चाहते तो वापस लौट भी सकते थे. लेकिन उन्होंने अपराधियों से मुकाबला किया. वह रेड करने के लिए नहीं गए थे. वह सिर्फ एक अपराधी को पकड़ने गए थे. यह महज संयोग था कि उस दौरान कई अपराधी मौजूद थे.
आशीष के परिवार को 21 लाख रुपए अकाउंट में कल डाल दिया जाएगा. मैंने मरणोपरांत आशीष को 50 हजार का पुरस्कार दिया है. उन्होंने कहा कि वह आशीष को वीरता पदक देने की अनुशंसा करेंगे. आज पुलिस संस्मरण दिवस पर उनके अमूल्य योगदान को याद किया जा रहा है. जो कभी भुलाया नहीं जा सकता.