बिहार में न’क्सली कम उम्र के गरीब युवकों को ह’थियार थ’मा रहे हैं। न’क्सली उन्हें अपनी टीम की सु’रक्षा में तै’नात कर रहे हैं। बीते गुरुवार को औरंगाबाद के देव के दक्षिणी इ’लाके के जंगल में सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन एवं न’क्सलियों के बीच मु’ठभे’ड़ में ढ़े’र तीन न’क्सलियों में दो कम उम्र के थे।
दाेनों के परिजनों ने कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते थे, लेकिन स्कूल नहीं होने व गरीबी के कारण ऐसा नहीं कर सके। इसका फायदा न’क्सलियों ने उठाया। गुरुवार को सीअसापीएफ से मु’ठभे’ड़ में मा’रे गए तीन न’क्सलियों में से दो पूरे परिपक्व भी नहीं हुए थे।
उनमें शामिल गया जिले के लु’टुआ था’ना के सोनदाहा गांव निवासी राजू उर्फ शिवसंत उर्फ बेला सिंह भोक्ता की उम्र महज 19 वर्ष थी। मा’रा गया दूसरा न’क्सली गया जिले के लुटुआ था’ना के ही नागोबार गांव का निवासी निरंजन उर्फ गोलू भोक्ता 22 वर्ष का था। इन दोनों न’क्सलियों के उम्र कम होने के कारण पुलिस की चिं’ता ब’ढ़ गई है।
दोनों के श’व लेने देव था’ना पहुंचे परिजनों ने तो उनकी उम्र और क’म बतायी। राजू के पिता बलिंद्र सिंह भोक्ता एवं गोलू के पिता नरेश भुइयां ने नम आंखों से कहा कि गांव की तरफ न’क्सली आते थे तो बच्चे उनके पास चले जाते थे। आदत ल’गी और वे न’क्सली बन गए। परिजनों ने न’क्सली क’मांड’रों के बारे में कुछ बोलने से परहेज किया।
केवल इतना कहा कि गरीबी इस तरह है कि बिना मजदूरी के घर का चूल्हा नहीं जलता है। जिस दिन मजदूरी नहीं मिलती है उस दिन भोजन की चिंता सताने लगती है। न’क्सली कमांडर बच्चों को संगठन में शामिल करने के लिए कई प्र’लोभन देते हैं। गरीबी के मा’रे बच्चे प्र’लोभन में आकर जब एक बार ह’थियार प’कड़ लेते हैं तो फिर छो’ड़ते नहीं हैं।

Input: Jagran