
SUPAUL : अगर नशा पर विराम नहीं लगा तो आने वाले तीन दशक के बाद भारत जो आज विश्व का सबसे नौजवान देश है वो जर्जर और भूखमरी के कगार पर खड़ा रहेगा. ये कहना है बीएमपी के डीजी गुप्तेश्वर पांडे का. श्री पांडे सुपौल के बीएसएस कॉलेज सभागार में नशा मुक्ति आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने नशा मुक्ति को लेकर बिहार सरकार के प्रयास की तारीफ करते हुए कहा कि अगर सौ वर्षों के बाद बिहार का इतिहास लिखा जायेगा तो सरकार के सबसे अच्छे कार्यों में बिहार सरकार के शराब बंदी कार्यक्रम का उल्लेख किया जाएगा.
कार्यक्रम में उपस्थित जन प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि आज भारत की जनसंख्या 125 करोड़ है और 80 करोड़ इसमें युवा हैं, लेकिन मौजूदा हालात में युवा नशे का शिकार होते जा रहे हैं.

उन्होंने गंभीर चिन्ता जताते हुए कहा आज लोग जात—पात और धर्म की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन समाज के लिए सबसे चिंता का विषय नशा है आज 9 वीं के छात्र भी नशे की गिरफ्त में हैं. अगर समय रहते समाज में नशा मुक्ति को लेकर चेतना नहीं जगी तो आने वाला समय भारत के लिए सबसे जर्जर काल होगा. इसके लिए उन्होंने समाज के जन प्रतिनिधियों को सामने आने की अपील की.
जानकारी के मुताबिक उनका मानना है कि हर जिले में युथ की एक टीम बनाई जाएगी जिसमे कम से कम सौ युथ होंगे। जो सीधे पुलिस से संवाद कर शराब बंदी को कामयाब बनाने का काम करेगा। इसमें आम लोगों के साथ मीडिया का सपोर्ट की भी बात कही.
खास कर के स्कूल में पढ़ने वाले भी नशबंदी के चपेट में आरहें है। लिहाजा ये बिहार ही नहीं पूरे भारत के लिए संकट की बात है। इससे निपटने के लिए उन्होंने कई स्कूल स्तर पर भी युवकों से संवाद भी किया था ताकि उन्हें इन चीज़ों की जानकारी हो सके.

गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि नशा त्याग करने का संकल्प लेना होगा. बिहार में पूर्ण शराब बंदी कानून लागू है इससे बाबजूद भी शराब का कारोबार हो रहा है. लोग चोरी छिपे शराब का सेवन कर रहे हैं जो काफी निंदनीय है. हमसब जागरूक नही होंगे तो समाज मे कानून तोड़ने रहेंगे ही अतः हमसबो का कर्तब्य है कि सभ्य समाज के निर्माण में जागें और जगाएं.
पांडेय ने कहा कि यदि आपको लगे कि शराब करबोर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी व कर्मी शामिल हैं तो साक्ष्य के साथ मुझे डायरेक्ट कॉल करें ऐसे तत्वों पर गारंटी के साथ कार्रवाई की जाएगी.

IPS गुप्तेश्वर पांडेय कम्युनिटी पुलिसिंग के मास्टर माने जाते हैं. पुलिस कप्तान के रूप में भी वे जिस जिले में रहे, अपराधियों में दहशत रही. वे अपनी पहली पोस्टिंग से ही लोगों के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं. उनके बारे में यह जगजाहिर है कि गुप्तेश्वर पांडेय की कार्यशैली ही ऐसी है, जिससे वे जहां भी जाते हैं अपराधियों में दहशत और आम लोगों में कानून के प्रति आस्था पैदा करते हैं.
शराब जैसे सामाजिक बुराई के विरोध में डी जी गुप्तेश्वर पांडेय ने मुहिम छेड़ी है इससे एक बार फिर आईपीएस अफसर गुप्तेश्वर पांडेय लोगों के बीच छा गये हैं और इन्हें तमाम लोग इसके लिए बधाई दे रहे हैं. लेकिन खास यह भी है कि जिस माहौल से पढ़-लिख कर गुप्तेश्वर आगे बढ़े हैं, यह बिहार ही नहीं पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरक है.

मुजफ्फरपुर में अपने कार्यकाल के दौरान उनका कार्यकाल काफी प्रशंसनीय रहा. उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़ कर अपनी महत्वपूर्ण सहभागिता दी और सामाजिक जन सरोकारों से जुड़े रहे. सामाजिक और प्रशासनिक सामंजस्यता को बरक़रार रखते हुए उन्होंने मुजफ्फरपुर शहर में कभी कोई बड़ा हादसा या दंगा फसाद नहीं होने दिया. गंभीर स्थितियों में वे स्वयं मौके पर पहुंच कर मोर्चा संभालते थे, चाहे वो यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट और कॉलेज प्रशासन के बीच हो या सांप्रदायिक तनाव का माहौल.
क्राइम कंट्रोल, ईमानदारी, कर्तव्य निष्ठा, अपने कर्मियों से संबंध, पब्लिक रिलेशन, छवि और कार्यकाल के आधार पर आईपीएस अफसर गुप्तेश्वर पांडेय 25 बेस्ट सुपर कॉप्स में भी शामिल किये गए हैं.

गौरतलब है कि मार्च 2018 में औरंगाबाद हिंसा की चपेट में आ गया था. तीन दिनों तक पत्थरबाजी व आगजनी को लेकर लोग दहशत में थे. हिंसा को लेकर वहां के लोग घरों में कैद हो गये थे. पुलिस मुख्यालय ने घटना की नजाकत को समझते हुए कटिहार में हिंसा को संभालने वाले बीएमपी के डीजी गुप्तेश्वर पांडेय को तुरंत औरंगाबाद भेजा गया. औरंगाबाद में भी उनकी पब्लिक रिलेशन कार्यवाही रंग लाई थी.