मथुरा का सरकारी अनाथालय. 29 अगस्त को यहां एक छह महीने और दो साल के बच्चे की मौत हो गई. 10 बच्चों की हालत नाज़ुक है. उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. अब ये सब हुआ क्यों? वजह है खाने में मिलावट.
सर्वज्ञ राम मिश्रा मथुरा के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हैं. उन्होंने कहा-
‘फ़ूड पॉइजनिंग की वजह से 12 बच्चे काफ़ी बीमार पड़ गए. जिसमें से दो की मौत हो गई. ये काफ़ी दुखद है. छह बच्चों की हालत इतनी ख़राब है कि उन्हें आगरा ले जाने को कहा गया है. जिसमें से दो की मौत हो गई. बाक़ी बच्चों का इलाज चल रहा है.’
उन्होंने माना कि बच्चों की मौत और तबियत ख़राब खाने की वजह से हुई है. अगर प्रशासन ने बच्चों के खाने का ध्यान रखा होता तो ऐसा न होता.

सर्वज्ञ राम मिश्रा आगे कहते हैं-
‘ये सारे बच्चे काफ़ी छोटे है. उनके खाने का सही ध्यान रखना चाहिए था. जैसे ही बच्चों की तबियत बिगड़ी थी, ऊपरी प्रशासन को अलर्ट कर देना चाहिए था. स्टाफ़ की तरफ से ढिलाई दिखाई गई है. अगर उन्होंने फुर्ती से काम किया होता तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी. ये मामला तुरंत हमारी नज़र में लाना चाहिए था. हमें ये आज (29 अगस्त) को पता चला है. ये बात हमें एक दिन पहले ही बता देनी चाहिए थी. हम वादा करते हैं कि इस मामले की जांच 24 घंटों के अंदर होगी. जो लोग दोषी है उनके ख़िलाफ़ सख्त करवाई होगी.’

अनाथालय में रहने वाले बच्चों के साथ किस तरह का बर्ताव होता है, ये कोई राज़ की बात नहीं है. ये जगज़ाहिर है. उनपर न ध्यान दिया जाता है. न कोई सुधबुध लेता है. बुरी अर्थव्यवस्था के बीच रहने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं होता. अच्छा खाना और कपड़े के लिए वो तरस जाते हैं.
इसी साल मई में औरंगाबाद के एक मदरसे में लड़कियां वहां का खाना खाने के बाद बीमार पड़ गई थीं. उन्हें खाने में बिरयानी खिलाई गई. बीमार पड़ने के बाद उन्हें घाटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. शुक्र है उन्हें बचाया जा सका.


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