#PATNA #BIHAR #INDIA : गंगा तो गंगा, उसकी पटना में सहायक नदियां भी प्रदूषण से मुक्त नहीं रहीं। गंडक, सोन और पुनपुन का जल नहाने तो दूर बर्तन धोने के लायक भी नहीं रहा। इन सभी नदियों का पानी सामान्य पीएच मान से अधिक है जो इनके पानी को क्षारीय बना रहा है। इसका असर नदियों की जैव विविधता पर भी पड़ रहा है। हालांकि तीनों में सबसे साफ सोन नद का पानी है। नेपाल से निकली 630 किमी दूरी तय करने के बाद पटना के पास आकर गंगा में मिलने वाली गंडक नदी का पीएच मान डुमरियाघाट गोपालगंज में 7.92 रहा।

जो इसके अधिकतम मान से कहीं ज्यादा है, जिससे पानी क्षारीय प्रवृत्ति का होने लगता है। पानी के पीएच का स्टैंडर्ड वैल्यू सात है। वहीं इस जगह पर टोटल केलिफॉम और फेकल केलिफाम का आंकड़ा भी सामान्य से कहीं ज्यादा है। यह इस ओर इंगित करता है कि इसमें इको-लाई के बैक्टीरिया की संख्या मात्रा प्रत्येक लीटर में ज्यादा है, वहीं फेकल से यह पता चलता है कि यह नहाने और बर्तन धोने के लायक भी नहीं है। नदी की यह स्थिति रोड और रेलब्रिज हाजीपुर, कोनहारा घाट और हरिहरनाथ मंदिर के पास लिये गये पानी के सैंपल से भी मिला है।

वहीं छोटानागपुर की पठारी से निकली दो सौ किलोमीटर लंबी पुनपुन नदी की स्थिति भी गंडक से कम नहीं है। किंजर रोड, जहानाबाद के पास लिये गये इसके सैम्पल में पानी का पीएच मान 7.90 पाया गया, जो सामान्य स्तर से ऊपर है। वहीं इसके सैंपल में इको-लाई बैक्टीरिया के किसी भी उपयोग में नहीं लाया जा सकने वाला आंकड़ा सामने आया है। इसे रीवर रिजुवेंशन कमेटी ने वर्ग घ की श्रेणी में डाला है। पुनपुन के फतुहा रेलब्रिज के पास से लिये गये सैंपल भी हर मानक पर फेल ही निकला।

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