राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में माता-पिता के जन्मस्थान से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य नहीं होगा। दिल्ली में शुक्रवार (17 जनवरी) को जनगणना और एनपीआर की तैयारियों को लेकर राज्यों के मुख्यसचिवों और जनगणना निदेशकों की बैठक में इस बाबत संकेत मिले हैं। राज्य सरकारों का कहना था कि एनपीआर में कभी जन्मस्थान जैसे आंकड़े नहीं मांगे गए।

राजस्थान के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने कहा कि एनपीआर में कई नए सवाल पूछे गए हैं, जिन्हें लेकर संशय है। माता-पिता का जन्म स्थान क्यों पूछा जा रहा है, व्यक्ति अपना जन्म स्थान बता दे वही ठीक है। देश में कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें अपना जन्म स्थान ही नहीं पता। इसके बाद गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिए कि माता-पिता का जन्मस्थान बताने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा। बैठक में बंगाल को छोड़ सभी राज्यों के अधिकारी पहुंचे।

फॉर्म में संशोधन होगा
फीडबैक के आधार पर केंद्र सरकार एनपीआर के फॉर्म में संशोधन के लिए तैयार है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि एनपीआर का एनआरसी से लेना-देना नहीं है। राज्यों को बताया गया है कि एनपीआर जनगणना के पहले की कवायद है।
अधिसूचना पर नोटिस
एनपीआर बनाने के लिए जारी की गई अधिसूचना पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। मामले पर सुनवाई 22 जनवरी को होगी। पश्चिम बंगाल के एक शिक्षक और कई अन्य ने यह याचिका दायर की है।

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