
MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : लगातार ब’ढ़ते वै’श्विक महामा’री कोरो’ना संक’ट के इस दौर में बाजार खुलने व सड़को पर बढ़ती भी’ड़ और वाहनों की लम्बी कता’रें देखने से लगता है, वाकई सब कुछ सामान्य हो गया है, पर हकी’कत यह है की सं’कट अभी ट’ला नहीं है, बल्कि और भी आक्रा’मक तरीके से ते’जी से बढ़ रहा है.

कोरो’ना संकट के बीच आम जनजी’वन को फिर से सड़क पर लाने के लिए, हालात सामा’न्य करने के लिए राज्य सरकार के निर्देश के बाद जैसे ही जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने उपभोक्ता आधारित वस्तुओं की दुकानों को खोलने का निर्देश दिया मानो लोग भू’ल गए कि लगातार जिले में कोरो’ना संक्र’मित मरी’जों का आंक’ड़ा बढ़ता ही जा रहा है. बाजार में दुकानें ऐसे खोल दी गई जैसे कोरो’ना वाय’रस को लेकर घोषित लॉ’कडाउन ख’त्म हो गया है या मानो कोरो’ना महामा’री ही ख़’त्म हो गया. लॉक डाउन की पाबं’दियों में मिली छू’ट का मतलब यह नहीं की हम इस छू’ट का दुरूप’योग करें और फ़ा’यदा उठायें.

बात दुकानदारों तक ही नहीं रही, खरीदारी के लिए भी लोगों की भी’ड़ बाजार में ऐसे उम’ड़ रही है की जगह-जगह भी’षण जा’म देखा जा रहा है. प्रचं’ड गर्मी के द’स्तक देते ही शहरवासी पंखे, कूलर, एसी खरीदने के कारण इलेक्ट्रॉनिक/इलेक्ट्रिकल मंडी तिलक मैदान रोड में सड़को पर बेत’रतीब ढंग से वाहन खड़ी कर खरीदारी कर रहे हैं, साथ ही सड़को तक फै’ले इलेक्ट्रॉनिक सामानों की वजह से भी राहगी’रों को परे’शानियों का सामना करना पड़ रहा है. जबकि महज कुछ ही दूरी पर पुलिस उपाधीक्षक याता’यात और याता’यात थानाध्यक्ष का कार्यालय है. कमोबेश यही स्थिति मुजफ्फरपुर के अन्य चौक चौराहों की भी है.

छोटी सरैयागंज से तिलक मैदान रोड और जवाहरलाल रोड जाने वाली दोनों ही लेन में कई घंटो से जा’म का आलम बना रहा. जिसके कारण सूतापट्टी, बैंक रोड और सरैयागंज टावर की और जाने वाले रास्ते में भी भी’षण जा’म फं’सा रहा. लॉकडाउन के चौथे चरण के दौरान पहली बार जिले में सामान्य दिनों के जैसे ही बाजार में भीड़ उमड़ पड़ी है. सरैयागंज टावर, पंकज मार्किट, गोला मंडी, कल्याणी, मोतीझील, जवाहरलाल रोड, तिलक मैदान रोड, अघोरिया बाजार, सब्जी मंडी, पुरानी बाजार, मिठनपुरा, जीरोमाइल, आदि जगह बिना किसी शारी’रिक दु’री का पा’लन करते हुए एक दूसरे से लग कर लोग ज’मकर खरीदारी कर रहे हैं. खरीदारी के वक्त न तो दुकानदार न ही ग्राहक फिजि’कल डिस्टें’स का पा’लन कर रहे हैं.

जहाँ राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा सोशल डिस्टें’सिंग का’यम रखने हेतु बनाये गए नियमो को ध’त्ता बताते हुए दुपहिया वाहनों पर दो-दो व्यक्ति सवार हैं, वहीं चारपहिया वाहनों में भी शारीरिक दु’री के अनुपालन की अनदे’खी की जा रही है. चारपहिया वाहन में चार-पांच व्यक्ति सवा’र देखे जा रहे हैं. लॉ’क डाउन की पाबं’दियों में मिली छू’ट से अगर हमें लगता है कि हम ठीक हैं, स्वास्थ्य हैं और हमें कुछ नहीं होगा, हम ऐसे ही मार्केट में घूमते रहेंगे, सड़कों पर जाते रहेंगे, और मा’स्क लगाकर ये सोचेंगे की हम कोरो’ना से ब’चे रहेंगे, तो ये सोच सही नहीं है. ऐसा करके हम अपने और अपने परिवार और अपनों के साथ अन्या’य करेंगे.

स्वास्थ्य विशे’षज्ञों का मानना है कि भारत में अब भी कोरो’ना वाय’रस का कहर संक्र’मण के सबसे बु’रे दौर में नहीं पहुंचा है. कोरो’ना की महामा’री से भले ही अभी निप’टने का तरीका नहीं समझ आ रहा है, लेकिन इसका मूल लॉ’जिक बेहद आसान है. लोग आपस में मेलजोल कर रहे हैं और संक्र’मण फै’ला रहे हैं. ऐसा घरों में भी हो रहा है, कार्यालयों में भी और यात्राओं में भी. यह मेलजोल, भीड़भाड़ अगर कम कर दी जाए तो एक शख्स से दूसरे शख्स को वाय’रस का ट्रांस’मिशन रु’केगा और नए मामलों में गिरावट आएगी. एक बात सौ फीसद सही साबित हो गई है कि कोरो’ना वाय’रस नामक महामा’री को फिजिकल डिस्टें’सिंग (भौतिक/शारीरिक दू’री) कायम कर रो’का जा सकता है. जिन देशों ने भी इस पर क़ा’बू पाया, वहां यही अचू’क हथि’यार अपनाया गया है.
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भारत में भी सोशल डिस्टेंसिंग का स’ख्ती से अनुपा’लन करने को कहा जा रहा है और इसीलिए सरकार को लगातार चार चरणों तक लॉ’क डाउन बढ़ाना पड़ा है. फ़िलहाल बिहार में कोरो’ना संक्र’मण किस हद तक फै’लता है या इस पर कैसे का’बू पाया जाता है यह इस बात पर निर्भर करता हैं कि सरकार, प्रशासन और समाज कोरो’ना वाय’रस संक्र’मण को कैसे संभालते हैं, इसे लेकर कैसी तैयारी है और इस महामा’री का बिहार पर क्या अस’र होगा. उम्मीद है कि हम इस संक’ट के दौर से निश्चित ही उब’रेंगे. लेकिन, हाला’त सामान्य करने को लेकर मिली छू’ट का हम सब ऐसे ही दुरूप’योग करते रहें तो अनुमान यह भी है कि हम कहीं अधिक बु’रे हाला’त में भी जा सकते हैं.
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