
PATNA : आइसा राज्य सचिव शिवप्रकाश ने कहा कि बीएड में बेतहाशा फीसवृद्धि और बीएड माफियाओं के लगातार बढ़ते मनमानी पर नीतीश कुमार अबतक चुप्पी साधे हुए है. बीएड कर रहे छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है. बीएड सत्र 2016-18 और 2017-19 के छात्रों का फॉर्म नहीं भरे जाने से सत्र लेट होता जा रहा है. लेकिन नीतीश इस पर कुछ पहल नहीं कर रहे है. ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री भी माफियाओं को मौन सहमति दे रहे है.
बिहार में चल रहे बीएड कॉलेजों में काबिज़ शिक्षा माफियाओं एवं उनकी मनमानी पर बिहार के मुखिया नीतीश कुमार की चुप्पी से बिहार के छात्र हितो का लगातार हनन हो रहा है. कोर्ट और सरकार के बीच चली फ्रेंडली फाइट में सरकार हार जाती हैं और कोर्ट के आदेश की आड़ में पुनः बिना किसी मुलभुत सुविधाओं एवं अन्य शर्तो का पालन किये बगैर मनचाही फीस थोप दी जाती है और छात्रों का पैसा शिक्षा माफियाओ की जेबों में भेजने का सरकारी इंतजाम कर दिया जाता है.

बीएड कोर्सो के शुरुआत से ही राज्य सरकार ने छात्रों से मोटी रकम वसूलने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाये है. 2015 में 95,000 से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये कर दिया गया. इससे भीं मन नहीं भरा तो प्राइवेट बीएड कॉलेजों के माफियाओ के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से फ़ीस बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में केस फ़ाइल कर दिया.

इस बहस में जहाँ छात्रों का भविष्य तय होने वाला था वहां सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल ने उपस्थित होना भी मुनासिब नहीं समझा. उलटे बिहार सरकार के पूर्व मंत्री भी प्राइवेट पार्टी की तरफ से बहस कर रहे थे. नतीजतन एक बार फिर बीएड कोर्स की फीस में 50,000 रुपये की व्यापक बढ़ोतरी करते हुए 1 लाख 50 हजार 840 रुपये कर दिया गया और प्राइवेट बीएड कॉलेजों को मनमानी करने की खुली छूट दे दी गयी.

आइसा राज्य सह सचिव आकाश कश्यप इस व्यापक फ़ीस बढ़ोतरी के खिलाफ वीर कुंवर सिंह विवि आरा से संबंधित बीएड कॉलेज के छात्रों ने हाईकोर्ट में रिव्यू पेटिशन डाला, लेकिन सरकारी वकील के हस्तक्षेप के कारण उसे भी अनसुना कर दिया जा रहा है, जिससे बाध्य होकर छात्रों ने कई तरह के आन्दोलन चलाये जिसमे आक्रोश मार्च, राजभवन मार्च तक किया गया. इसके बाद भी कोई हल नहीं निकलने पर वीर कुंवर सिंह विवि में आइसा और छात्र राजद के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया गया जिसके छठे दिन कुलपति ने 95,000 रुपये एवं एक शपथ पत्र के साथ फॉर्म भरने पर समझौता हुआ.