गुंजन सक्सेना : देश की बहा’दुर बेटी जिसने मिसा’इलों के बीच घा’यल जवानों को किया था एयरलि’फ्ट

NEW DELHI : फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना ने कारगिल वॉ’र में निडर होकर चीता हेलीकॉप्टर उड़ाया। महिला पायलट के इस तरह का सा’हस दिखाने पर उन्हें वी’रता, साह’स और देशप्रेम के लिए शौ’र्य पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।

कारगिल यु 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ ल’ड़ा गया था। यु’द्ध में भारत के जवानों ने अपनी शौ गाथा का ऐसा लोहा मनवाया जिसे याद कर आज भी दुश्मन देश भयभीत होता है। जब-जब भारत और पाकिस्तान का यु’द्ध के मैदान में आमना-सामना हुआ है पाकिस्तान को हा’र का मुंह देखना पड़ा है। यूं तो कारगिल के कई हीरो हैं लेकिन एक महिला जवान भी हैं जिन्होंने अपनी बहा’दुरी के जरिए दुश्म’नों को धू’ल च’टाई।

महिला जवान का नाम हैं गुंजन सक्सेना 1999 में गुंजन की पोस्टिंग 132 फॉरवर्ड एरिया कंट्रोल में की गई थी। उनकी उम्र तब मात्र 25 वर्ष थी। 1975 में जन्मीं गुंजन पायलटों के दल में एकमात्र महिला थीं। वह पहली महिला पायलट थीं जो वॉ’र जोन में गईं। यु’द्ध के दौरान उन्होंने ने यु’द्ध क्षेत्र में निड’र होकर चीता हेलीकॉप्टर उ’ड़ाया था। इस दौरान वह द्रास और बटालिक की ऊंची पहाड़ियों से जवानों को सु’रक्षित वापस लेकर आई थीं।

ये सुनने में जितना आसान लग रहा असल में उतना था नहीं। दरअसल, वह ची’ता हेलीकॉप्टर उड़ा रही थीं और ये हेलिकॉप्टर अपॉचे या अन्य हेलीकॉप्टर की तरह वॉ’र लाइफ हेलीकॉप्टर नहीं होते। पाकिस्तानी सैनि’कों के पास स्ट्रिंगर मिसा’इल थीं। इन मिसा’इलों को कंधे पर रखा ही चलाया जाता है। दुश्म’न देश की सेना उनके हेलिकॉप्टर पर यहीं मिसा’इलें दा’ग रहे थे लेकिन निशाना सही न होने के चलते दुश्म’न उनका कुछ नहीं बिगाड़ सके।

इन सब चुनौ’तियों के बीच गुंजन सक्सेना ने अपना काम बेहद ही स्मार्ट तरीके से किया। इस दौरान उन्होंने सा’हस का परिचय देते हुए कई घा’यल सैनिकों को वहां से एयरलिफ्ट किया और जरूरी सामान पहुंचाया। महिला पायलट के इस तरह का साहस दिखाने पर उन्हें वी’रता, साहस और देशप्रेम के लिए शौ’र्य पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। गुंजन सक्सेना के परिवार में पिता और भाई भी सेना के लिए सेवाएं दे चुके हैं। गुंजन सक्सेना 44 की उम्र में एयरफो’र्स से रिटायर हुईं थीं।

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