बिहार : नीतीश की बीजेपी को शह

नीति आयोग ने सतत् विकास लक्षय सूचकांक 2020-21 रिपोर्ट को उजागर कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जख्म को हरा कर दिया है। अपने सतत् विकास लक्षय सूचकांक में आयोग ने बिहार को नीचले पायदान पर रखा है। गरीबी उन्मूलन में तमिलनाडू और दिल्ली ने अच्छे परिणाम दिए है। सामाजिक,आर्थिक और पर्यावरणीय पैमाने को ध्यान में रख कर नीति आयोग राज्यों की रैकिंग करता है।

फरवरी में नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग की थी। उनकी बातें सुनी गई पर कुछ बात नहीं बनी। फिर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते है कि प्रधानमंत्री बिहार में एनडीए गठबंधन सरकार को विशेष महत्व दें। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक दशक से ज्यादा समय से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग किया जाता रहा है। विशेष राज्य के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रैली भी कर चुके है। हर बार उनकी बात अनसुनी कर दी जाती रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वंय नहीं बल्कि पार्टी के अंदर से आवाज उठवाई है। पार्टी के नेता और एमएलसी उपेन्द्र कुशवाहा से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग क उठवाया है।

उन्होंने प्रधानमंत्री को टैग कर कहा है कि बिहार विभाजन के उपरांत प्राकृतिक संपदाओं का अभाव और बिहारवासियों पर प्राकृतिक आपदाओं का लागातार दंश के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए सरकार को अपने कुशल प्रबंधन से बिहार के विकास को गति देने में लगे हु है। उसका समर्थन बिहार में एनडीए की सहयोगी और हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने भी किया है। मांझी का कहना है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा अभी नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा। बिहार में डबल इंजन की सरकार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सरकार को आर्शीवाद मिला हुआ है। बिहार को आधारभूत संरचना ठीक करने के लिए विशेष राज्य का दर्जा मिलना ही चाहिए। श्री मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का समर्थन करते हुए कहा कि बाढ़ से बेहाल बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना ही चाहिए।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार बिहार के विकास की बात करते है पर नीति आयोग की रिपोर्ट ने उनके दावे पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। राजद नेता तेजस्वी ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा विपक्ष तो नहीं देगा। प्रधानमंत्री के करीबी नीतीश कुमार को बिहारवासियों के हक को लेने में परेशानियां नहीं होनी चाहिए। आपको बता दे कि देश क 29 राज्यों में से 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है।

जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी का विशेष राज्य के दर्जे के मुद्दे पर कहना है कि नीति आयोग की रिपोर्ट से बिहार के विशेष राज्य के दर्जे की मांग को मजबूती मिलती है। कांग्रेस के पार्षद प्रेमचंद मिश्रा का कहना है कि जेडीयू विशेष राज्य की मांग कर ढोंग कर रहा है। मुख्यमंत्री जब भी समस्याओं से घिरते है तब वे विशेष राज्य का दर्जा का राग अलापने लगते हैं। जब बीजेपी से हाथ मिलाकर सरकार बनाया उसी वक्त अपनी बात मनवा सकते थे।

आरजेडी का कहना है कि मुख्यमंत्री अपनी नाकामी का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ना चाहते है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने तंज कसते हुए कहा कि 16 साल का हिसाब जनता मांगेगी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाग नहीं सकते।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार को विशेष राज्य के दर्जा मिलने की संभावना है। यहां बड़ी संख्या में भूमिहीन रहते है.हर साल बाढ़ और सूखा जैसी आपदा लोग झेलते है। साथ ही केंद्र सरकार को गरीब राज्य की परिभाषा भी बदलनी होगी। गरीब राज्यों का तेजी से विकास ही देश की गिरती विकास दर को थामा जा सकता है और क्षेत्रीय विषमता को पाटने में कारगर हो सकता है इसलिए गरीब राज्यों के वित्तीय प्रवाधानों को बदलने को लिए विशेष राज्य का दर्जा समावेशी विकास के लिए जरूरी है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading