मुजफ्फरपुर। कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी एंटीजन किट की कालाबाजारी के आ’रोपित सदर अस्पताल प्रबंधक प्रवीण कुमार को क्लीनचिट मिल गई है। आनन-फानन में उन्हें योगदान कराया गया। उनके योगदान देने के बाद अस्पताल परिसर में तरह-तरह की चर्चा होने लगी।

कर्मी के साथ अन्य लोग पूरी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं सिविल सर्जन डा. बीरेन्द्र कुमार ने कहा कि प्रबंधक दो’षी नहीं हैं। उनपर प्रा’थमिकी द’र्ज हुई थी। लेकिन पुलिस जांच में उनपर दो’ष सिद्ध नहीं हुआ। सीएस के साथ एसीएमओ व जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने एक-एक बिंदु पर जांच कर क्लीनचिट दी है।

मामला को’र्ट में चल रहा। ज’मानत नहीं मिलने की बात पर सीएस ने कहा कि उनसे शपथ पत्र लिया गया है। अगर आगे उनपर दो’ष सिद्ध होता है तो वेतन मद से राशि वसूली जाएगी। प्रवीण कुमार मेडिकल अवकाश पर थे। इसको लेकर भी चर्चा हो रही कि प्रा’थमिकी दर्ज होने के बाद किसने उनका अवकाश स्वीकृत किया।

10 माह में उनके निलंबन की का’र्रवाई क्यों नहीं हुई और उनकी जगह किसी अन्य प्रबंधक की स्थायी नियुक्ति क्यों नहीं हुई, इसपर भी सवाल उठ रहा। मालूम हो कि पिछले साल मई में एंटीजन किट की कालाबाजारी का मामला सामने आया था।
इस संबंध में सकरा थाने में प्रा’थमिकी द’र्ज कराई गई थी। तत्कालीन प्रशिक्षु डीएसपी सतीश सुमन ने मामला दर्ज किया था। इस मामले में सकरा प्रखंड अंतर्गत सुस्ता निवासी अशोक ठाकुर के घर से चार हजार सरकारी एंटीजन किट, साबुन, सैनिटाइजर आदि सामान बरामद किए गए थे। सदर अस्पताल के लैब टेक्नीशियन लव कुमार को मामले में गि’रफ्तार किया गया था।
लव के बयान पर सदर अस्पताल में पदस्थापित माड़ीपुर के दीपक कुमार, भगवानपुर के आनंद कुमार, बलिगांव बेलादम के मिथिलेश कुमार व सकरा रेफरल अस्पताल के लैब टेक्नीशियन नालंदा जिला के मिलत निवासी अवधेश कुमार को गि’रफ्तार कर जेल भेजा गया। मामले में सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रवीण कुमार व सरैया सीएचसी के लैब टेक्नीशियन अमितेष को भी आ’रोपित बनाया गया था। बावजूद दोनों पुलिस गि’रफ्त से बाहर रहे।
