मुजफ्फरपुर : दरभंगा हाइवे पर स्थित वसंत पैलेस में द वे थिएटर ग्रुप और एडमा संस्था की ओर से विश्व रंगमंच दिवस मनाया गया। जिसमें एक नाटक की प्रस्तुति की गई। इसके निर्देशक डॉ.सौरभ कौशिक थे। नाटक के माध्यम से विश्व रंगमंच दिवस की शुरुआत और उसके उद्देश्यों को चिन्हित किया गया।
इसमें चंदन, राजेश, कृति केसरी, अमन और वरण ने अभिनय किया। साथ ही मुजफ्फरपुर के रंगकर्म की दशा और संभावनाएं पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया।
सेमिनार को संबोधित करते हुए कुमार विरल ने कहा कि आज रंगकर्मी को अभाव में प्रभाव छोड़ना चाहिए और संगठित होकर कलाकारों को रहना चाहिए तभी इसमें कुछ संभावना की तलाश की जा सकती है। नाटक एक दृश्य काव्य है। मुजफ्फरपुर अघोषित सांस्कृतिक राजधानी है। इस समय हमें साहित्यिक विचार को मंच देना होगा। ना कि राजनीति को बढ़ावा देना है।

प्रो.जयकांत ने कहा कि नाटक कई कलाओं का मिश्रण है। आज हम सभी को तकनीकी ज्ञान को अर्जित करना होगा। संवाद के नए शैली को विकसित करना होगा। यशवंत पाराशर ने कहा कि आज हम सभी को संकुचित बात पर ध्यान न देकर इंक्लूसिव विचार को स्वीकार करना होगा। किसी भी चीज को अर्जित करने के लिए हमको प्रशिक्षण लेना बहुत जरूरी है। परिवर्तन को स्वीकार करने की हम सभी को आदत डालनी होगी।
पास्ट रहने की जगह नहीं है, हर किसी को वर्तमान में जीना स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने अभी के यूक्रेन और रशिया की लड़ाई पर भी सवाल किया और उसको सभ्यता, संस्कृति और संस्कार के साथ समझाया।
वहीं दूसरी तरफ जुब्बा सहनी पार्क और ऑडिटोरियम के बाहर एक नुक्कड़ नाटक करके लोगों के बीच विश्व रंगमंच दिवस की उद्देश्य को समझाया जिसमें वरिष्ठ बैजू भाई,कुमार विरल, राजेश, चंदन ,अमन, कृष्णा ,शेखर सुमन, सुमन वृक्ष, अजय विजेता, रवि कुमार ,दीनबंधु, चितरंजन कुमार इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।



