मुजफ्फरपुर। एईएस की रोकथाम में लापरवाही पर सीएस डा.वीरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है। 15 फरवरी को योगदान तथा 10 अप्रैल को निलंबन यानी 54 दिन तक ही कुर्सी पर रह पाए। इस दौरान कई बार इनकी कार्यशैली पर सवाल उठे। कोरोना के दौरान एंटीजन कीट कालाबाजारियों की मदद को लेकर चर्चा में आए थे। इनके निलंबन से सीएस कार्यालय में खलबली मच गई। पटना से विभागीय मेल का इंतजार होने लगा। शाम चार बजे मेल आने के बाद प्रभारी सीएस डा. सीएस प्रसाद ने कहा कि उनके निलंबन की विभागीय सूचना आ गई है।
इसकी जानकारी जिलाधिकारी कार्यालय को दे दी गई है। इस बीच नए सीएस को लेकर तरह-तरह की चर्चा होने लगी। किसी ने कहा कि एसीएमओ डा. सुभाष सिंह को तत्काल प्रभार मिलेगा। जानकारी के अनुसार सिविल सर्जन डा. कुमार अवकाश पर गए थे। इस बीच उनके निलंबन की सूचना आ गई। जिला सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी कमल सिंह ने निलंबन की पुष्टि करते हुए कहा कि लापरवाही के कारण विभाग ने एक्शन लिया है।
प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के निरीक्षण के दौरान वे कार्यालय से अनुपस्थित मिले। प्रधान सचिव ने जब एईएस की जमीनी तैयारी की हकीकत देखी तो दंग रह गए। प्रचार-प्रसार से लेकर रोस्टर तक की खामियां मिली। सीएस पर आरोप है कि सात अप्रैल को एईएस की समीक्षा में वे मौजूद नहीं थे। उन्होंने इसकी सूचना भी नहीं दी थी। इसके अलावा आठ अप्रैल को प्रधान सचिव के निरीक्षण में भी मौजूद नहीं थे।
आरोप यह भी है कि वह अगले रविवार तक कार्यालय से अनुपस्थित हैं, लेकिन इसकी सूचना मुख्यालय को नहीं दी गई। इससे पहले भी डीएम ने एईएस की बैठक में सीएस के देर से आने पर नाराजगी जतायी थी। जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक जिलाधिकारी ने अपने स्तर से सीएस की कार्यशैली को लेकर मुख्यालय को रिपोर्ट की थी।
एंटीजन किट कालाबाजारी करने वालों का सहयोग करने तथा पीपी मोड पर चल रहे एक्स रे सेंटर के निरीक्षण के समय खामियां दिखने के बाद बकाया भुगतान करने को लेकर इनकी कार्यशैली पर सवाल उठे। गैर निबंधित अल्ट्रासाउंट सेंटर के खिलाफ सीएस के निर्देश पर एसीएमओ डा. एसपी सिंह ने अभियान चलाया। आधा दर्जन सेंटर पर गड़बड़ी पाई गई। एक आदमी द्वारा तीन अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाने का मामला सामने आया। एसीएमओ की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डालते हुए सीएस ने इसे खोलने का आदेश दे दिया। डीएम तक शिकायत पहुंची।

