मुजफ्फरपुर का प्रदूषण ग्राफ पहुंचा औरेंज जोन में….

मुजफ्फरपुर :  तापमान बढ़ने के साथ उड़ती धूल ने शहर के प्रदूषण स्तर का ग्राफ बढ़ा दिया है। नालों की हालत, सड़क जगह जगह से टूटना इन सभी ने शहर की रंगत ही बदल दी है। यहां वहां कूड़े फ़ेंक रहें लोग। ऐसे कई अनेक कारण है जिससे  मंगलवार को मुजफ्फरपुर संवेदनशील औरेंज जोन में पहुंच गया है।

gorakhpur again came in orange zone on the measurement of pollution AQI  improved - यूपी के इस शहर में बन-बिगड़ रहे आबोहवा के हालात, फिर आया रेड से ऑरेंज  जोन में

समाहरणालय परिसर व आसपास प्रदूषण का ग्राफ 267एक्यूआइ तथा एमआइटी के आसपास 282 एक्यूआइ पर था। वहीं रेलवे स्टेशन, मोतीझील, कलमबाग चौक आदि इलाके में एमआइटी इलाके से अधिक प्रदूषण रहा। शहर के प्रदूषण में मुख्य रूप से पाल्युटेंट में पीएम 2.5 यानी सूक्ष्म, धूल, कण की मात्रा ही सबसे अधिक है। विशेषज्ञ की मानें तो इसके कारण सांस संबंधी परेशानी ज्यादा होती है।

प्रदूषण नियंत्रण विभाग एयर क्वालिटी इंडेक्स को जीरो से 500 तक मापता है। जीरो से 50 एक्यूआइ तक हवा अच्छी मानी जाती है और इसे सेहत के नजरिए से ग्रीन जोन में माना जाता है। 51 से 100 के बीच येलो जोन आता है। एक्यूआइ 150 के पार होने पर औरेंज जोन में इसे कहा जाता है।

 

इसका अर्थ है कि हवा बुजुर्गों और बीमारों के लिए ठीक नहीं है। एक्यूआइ 151 से 200 के बीच रेड जोन में आता है। जब एक्यूआइ 201 से 300 के बीच हो तो सेहत के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसके 301 के पार जाने पर इसे सेहत की दृष्टि से हेल्थ इमरजेंसी की श्रेणी में माना जाता है।

यह होना चाहिए जो नहीं हो रहा :- पुराने वाहनों का लगातार परिचालन, शहर में यातायात की हालत खराब, जाम लगने से लगातार धुआं निकलने से प्रदूषण बढ़ गया है। शहर में जगह-जगह पर कचरा जलाया जा रहा है। इसकी निगरानी नहीं हो रही है।

सड़क की सफाई हो, उनपर नाले की गाद न रहे तो मिलेगी राहत। निर्माण कार्य चलने वाली सड़कों पर पानी का छिड़काव, रोड की सफाई, निर्माण सामग्री को ढंक कर रखने से राहत मिल सकती है।

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