मखाना उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए विज्ञानियों से कैमरा वाला यंत्र बनाने का आह्वान, जानें विस्तार से…

समस्तीपुर। मौसम में बदलाव विज्ञानियों के लिए चुनौती बन गई है। इस दिशा में उन्हें एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है। किसानों की उन्नति के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।

ये बातें पूसा स्थित डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. आरसी श्रीवास्तव ने आयोजित 12वीं अनुसंधान परिषद की बैठक में कहीं। उन्होंने कहा कि सब्जियों की खेती के लिए भी कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों की जरूरत होती है।

आगे नवीनतम प्रभेदों पर कार्य करना है जो सर्दी और गर्मी की अनिश्चितता को झेल पाएं। उन्होंने कहा कि एक ऐसा यंत्र विकसित करने की जरूरत है, जिसमें कैमरा लगा हो। इसका उपयोग कर मखाना उत्पादन से जुड़े कार्य को पूरा कर सकते हैं। इस क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की भारी कमी है। विज्ञानी अगर ऐसा निर्माण करते हैं तो निश्चित बड़ी बात होगी।

 

कुलपति ने कहा कि अनुसंधान पर जोर देने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में बायोडायवर्सिटी एवं तितली पार्क की स्थापना की गई है। तितलियां परागण के अतिरिक्त किस क्षेत्र में सहायक हो सकती हैं, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। यहां कृषि अवशेषों के उपयोग के लिए तकनीक विकसित की गई है, जिसका बेहतर परिणाम आ रहा है।

अन्य क्षेत्रों में भी विकसित कृषि प्रणाली लागू करने के लिए अनुसंधान जारी है। विश्वविद्यालय में तीन नए सेंटर फार एक्सीलेंस की स्थापना की गई है। ये जल्द ही क्रियाशील हो जाएंगे। इनमें सेंटर फार एक्सीलेंस आन इकोनामी पालिसी एंड रूरल डेवलपमेंट, सेंटर फार एक्सीलेंस आन मिलेट और सेंटर फार एक्सीलेंस आन नेचुरल फार्मिंग हैं।

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