बिहार के बांका सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल का दर्जा काफी पहले ही मिल चुका है। जिसके भवन निर्माण का कार्य जारी है । लेकिन फिर भी कई मायनों में यहां की खामियां और आसुविधाएं कुछ मौकों पर सामने आ ही जाती हैं, जिससे मरीजों का मर्म कम होने की बजाय बढ़ जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा सोमवार को भी सदर अस्पताल में देखने को मिला।

जब तकरीबन दोपहर 12:00 बजे भीषण गर्मी व चिलचिलाती धूप में एक मूर्छित महिला को दो लोग स्ट्रेचर की जगह बांहों पर झुलाते हुये इमरजेंसी वार्ड ले कर जा रहे थे। महिला के कपड़े भी अस्त-व्यस्त थे। जबकि वहां मौजूद लोग हैरत भरी निगाह से उसके मर्ज को जानने की कोशिश कर रहे थे।

उसके प्राथमिक उपचार के बाद पता चला कि यह दो गोतनियों के बीच हुई लड़ाई का नतीजा है जिसे उसकी जेठानी ने मार कर उसकी ये हालत बना दी है । बरहाल जो भी हो , लेकिन महिला को इस कदर बाहों में टांग कर इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाने की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।

स्ट्रेचर की है सुविधा
ऐसी बात नहीं है कि सदर अस्पतल में स्ट्रेचर की सुविधा नहीं है। यहां प्रयाप्त स्ट्रेचर हैं। लेकिन इमरजेंसी वार्ड तक मरीजों को पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर कड़े धूप में रखे गए थे । जिस पर लिटा कर महिला को इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाना संभव नहीं लग रहा था। जिससे उनके परिजन उसे बाहों में टांग कर इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाना मुनासिब समझ रहे थे । स्ट्रेचर की सुविधा नहीं रहने पर और परेशानी बढ़ती है।

वार्ड ब्यॉय की नहीं है सुविधा
सदर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटा कर वार्ड तक पहुंचाने के लिये वार्ड ब्यॉय नहीं हैं। इससे मरीज के परिजनों को खुद ही मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटा कर वार्ड तक पहुंचाना पड़ता है हालांकि मानवता के नाते कभी गार्ड कभी स्वीपर तो कभी स्वास्थ्य कर्मी खुद मरीज को स्ट्रेचर पर लिटा कर ले जाते हैं। गौरतलब है कि वार्ड ब्यॉय के भी नहीं रहने की वजह से लोगों को और परेशानी होती है।