मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर आई हास्पिटल में अपनी आंख गंवाने वालों की पटना में जांच होगी। वहां पर विशेषज्ञ चिकित्सक इस बात का आकलन करेंगे कि जो आंख बची है उसे किस तरह से बचाया जाए। राजेंद्र नगर पटना स्थित अति विशिष्ट नेत्र अस्पताल में सभी को भेजा जाएगा।
जांच टीम ने सीएस को इसके बारे में उचित दिशा-निर्देश दिया है। जानकारी के अनुसार दो दिन पहले विशिष्ट नेत्र अस्पताल पटना के अधीक्षक डा.हरीश चंद्र ओझा ने कहा कि आई हास्पिटल में मोतियाबिंद के आपरेशन के बाद आंख गंवाने वाले 19 लोगों की दूसरी आंख से रोशनी नहीं आ रही है। उनकी आंखों की जांच की जाएगी।
अगर जरूरत पड़ी तो आपरेशन करा, उसमें लेंस लगाया जाएगा। आपरेशन पटना के आइजीएमएस में होगा। टीम ने उनकी आंखों की जांच की है, जिसमें उन्हें शंका है कि अगर दूसरी आंख में इंफेक्शन हुआ तो वह धीरे-धीरे उसे भी खराब कर सकता हैं। ऐसे में आंख की जांच कर उसका इलाज अभी हो सकता हैं।
मालूम हो कि मुजफ्फरपुर आई हास्पिटल में पिछले साल 22 नवंबर को 65 मरीजों का मोतियाबिंद का आपरेशन हुआ था। इसमें 19 लोगों के आंख की रोशनी चली गई थी। उसके बाद मुजफ्फरपुर आई हास्पिटल के सचिव प्रबंधक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
दूसरी ओर से हाईकोर्ट में भी मामला चल रहा है। विभाग की ओर से हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पटना से चिकित्सक टीम का गठन किया है।
अपनी आंख गंवा चुके राममूर्ति सिंह, हरेंद्र रजक, पन्ना देवी, प्रेमा देवी, भरत प्रसाद सिंह, सुखदेव सिंह, शत्रुघन महतो, भरत पासवान व सावित्री देवी ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दर्ज कराया है। इस पर सुनवाई चल रही है।
