मुजफ्फरपुर। राज्य में भूमि संबंधी मामलों का निष्पादन ससमय और पारदर्शी तरीके से कराने को लेकर कई व्यवस्थाएं बनाई गईं। इसका दुखद पहलू यह है कि ये व्यवस्थाएं राजस्व कर्मचारी और अंचल अधिकारियों की मनमानी की भेंट चढ़ गईं। पिछले दिनों विभाग के निर्देश पर जिले के सभी अंचल कार्यालयों का एक साथ निरीक्षण हुआ।
इसमें ये बातें सामने आईं कि मानक के अनुरूप कहीं काम नहीं हो रहा। दाखिल-खारिज के आवेदन बड़ी संख्या में लंबित हैं। वहीं निष्पादित आवेदनों में भी काफी गड़बडिय़ां हैं। सभी अंचलों के राजस्व कर्मचारियों से स्पष्टीकरण तो मांगा गया है, मगर इससे स्थिति बदलने की गारंटी नहीं ही मानी जा सकती है।
डीएम प्रणव कुमार ने मुशहरी अंचल कार्यालय का निरीक्षण किया था। उन्होंने पाया कि अंचल में 5548 दाखिल-खारिज के 5548 आवेदन लंबित हैं। अतिक्रमणवाद के मामलों के निष्पादन में समय-सीमा का ध्यान ही नहीं रखा गया। डीएम ने अधिकांश अभिलेख की स्थिति सामान्य नहीं पाई। लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम की फाइल संधारित नहीं थी। वहीं आदेश का अनुपालन भी नहीं होने की बात सामने आई।
लिपिक ललित ठाकुर से स्पष्टीकरण मांगा गया। भू-मापी के मामले में भी काफी गड़बड़ी मिली। पंजी से यह पता नहीं चल रहा था कि मापी कब की गई। कई मामलों के निष्पादन के बारे में देरी को लेकर अंचलाधिकारी की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। डीएम ने इसे गंभीर माना।
पारू अंचल की जांच में यह बात सामने आई कि कर्मचारी के स्तर पर ही आनलाइन दाखिल-खारिज के अधिकांश मामले लंबित हैं। यहां सीओ ने पद संभालने के बाद एक भी आनलाइन आवेदन का निष्पादन नहीं किया।
अंचल में 16 हजार से अधिक मामलों का निष्पादन समय सीमा बीत जाने के बाद किया गया। किसी भी मामले की फाइल संधारित नहीं पाई गई। कमोबेश यही स्थिति अन्य अंचलों में पाई गई।
