पटना। बिहार में 74,330 प्रारंभिक, 9,360 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा को बेहतर बनाने की कोशिशों के तहत उसमें आने वाले बदलावों का सालाना आकलन होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग के स्तर पर स्वतंत्र इकाई गठित होगी, जो इस व्यवस्था को देखेगी। इस मुहिम को इसी साल से शुरू करने की तैयारी है। इसमें स्कूलों के साथ विद्यार्थियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा। इसके आधार पर ही उन्हें जरूरी सुविधाएं और मदद दी जाएगी।
शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी के मुताबिक स्कूली शिक्षा में अब इनोवेशन पर फोकस ज्यादा होगा, जिसमें प्रत्येक स्कूल में इस दिशा में उठाए गए कदमों और ऐसी प्रतिभाओं को पहचाना जाएगा। साथ ही स्कूलों की रुचि को पहचान करके उन्हें आगे बढऩे में मदद दी जाएगी।
शिक्षा विभाग ने फिलहाल इनोवेशन प्रोग्राम के लिए रोडमैप तैयार करने का जिम्मा राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को सौंपा है।
रोडमैप के आधार पर एससीईआरटी स्कूली शिक्षा को गुणवत्ता को परखने का का काम करेगा। साथ ही, छात्र-छात्राओं की प्रतिभा की पहचान भी करेगा। रोडमैप के मुताबिक, प्रदेश भर के सभी सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता को जांचने का काम शुरू किया जाएगा।
यह पूरा आकलन आनलाइन होगा। इसके जरिए जहां स्कूलों की गुणवत्ता का पता चलेगा, वहीं प्रत्येक छात्र/छात्रा की संपूर्ण प्रगति भी सामने आएगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को जांचने के लिए इस पहल के साथ बिहार सरकार से भी अपने स्तर पर गुणवत्ता को आंकने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है। आपको बता दें कि नई शिक्षा नीति में स्कूलों की व्यवस्था पूरी तरह बदलने वाली है।
