मुजफ्फरपुर : रोहुआ स्थित किलकारी बाल केंद्र में सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान की ओर से पुरखा पुरनिया संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के संयोजक लोक कलाकार सुनील कुमार ने की। उन्होंने बताया कि संस्कृति, आचार विचार और इतिहास का सही बोध कराने, बच्चों व युवाओं के बीच आत्मिक विकास के लिए पुरखा पुरनिया संवाद कार्यक्रम मुजफ्फपुर के अलग-अलग स्थानों पर चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध गजल गायक व बनारस घराने के मशहूर संगीतकार उस्ताद वज्जन खान 1947 में मुजफ्फरपुर आए थे और फिर यही के होकर रह गए। उन्होंने ख्याल, ठुमरी व गजल गायकी में काफी नाम कमाया था। आकाशवाणी पटना से उनके कार्यक्रम नियमित रूप से प्रसारित होते थे। मुजफ्फरपुर आने से पहले उनके कार्यक्रम लखनऊ से प्रसारित होते थे। उन्हें नेशनल इंडियन म्यूजिक सर्किल द्वारा 2005 में संगीत सम्मान से सम्मानित किया गया था। पारंपरिक गायकी के स्तंभ के रूप में विख्यात खान साहब के गले से सुरो का सच्चा स्वरूप निकलता था। उनके करीबी मित्र कलाकारों उस्ताद बिस्मिल्लाह खां,उस्ताद रईस खान व उस्ताद सुल्तान खां थे।
गुलाम अली ने बताया कि “उस्ताद वज्जन खान” को मरणोपरांत मुजफ्फरपुर से मिट्टी मंजिल के लिए बनारस ले जाया गया था और शहनाई के जादूगर बिस्मिल्लाह खां के बगल में ही दफनाया गया था।
कला निर्देशक अजय कुमार ठाकुर ने बताया कि जब देश कला संस्कृति के लिए बनारस और कोलकाता की ओर देखा करता था तब बनारस और कोलकाता मुजफ्फरपुर कि ओर।
जिंदगी भर संगीत सम्मेलन व आकाशवाणी पर सुरो का जादू बिखेरने वाले प्रसिद्ध गजल गायक व बनारस घराने के मशहूर संगीतकार “उस्ताद वज्जन खान” की गायिकी से प्रसन्न होकर बड़े गुलाम अली कोलकाता में हो रहे संगीत सम्मेलन में गले लगाया था।
संगीत रत्न विभूति को नमन करते हुए किलकारी बाल केन्द्र में खुशी, आस्था, शिवानी, कोमल, प्रियांशी, ऋतु, श्वेता, मुस्कान, रूबी, मीनाक्षी, संगीता, तन्नु, मानसी, छोटी, सपना ने गीत ए ही माटी के संगीतकार “उस्ताद वज्जन खान” गावेले गाना बना के लहरा गीत गाकर श्रद्धा सुमन अर्पित की। किलकारी बाल केन्द्र की समन्वयक आरती कुमारी ने बताया कि किसी भी देश का विकास वहां की संस्कृति से होती है और संस्कृति का विकास लोक संस्कृति से। ऐसे ही गंगा-यमुनी के संस्कृति के महान वाहक थे।
प्रसिद्ध गजल गायक व मशहूर संगीतकार “उस्ताद वज्जन खान” को याद करना ही “पुरखा पुरनिया” को सम्मान देना है। धन्यवाद ज्ञापन सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष युवा समाजसेवी धीरज कुमार ने दी और बताया कि कलाकार बनते-बनते मनुष्य बेहतर इंसान बन जाते हैं ऐसे ही बेहतर इंसान संगीतकार उस्ताद वज्जन खान थे। उस्ताद वज्जन खान स्मृति समारोह में अमन, साहिल, सौरभ,विशाल,रोहन,सचिन, ऋषभ पंथ, सुधांशु, ओम प्रकाश, अनुराग, अभिषेक, करण, संजीत, शामिल हुए।
