पटना : 60 लाख कमाई….रे’ड पड़ी तो 8 करोड़ मिले, फार्मासिस्ट की डिग्री 5-5 लाख में बेचता था पटना का ड्रग इंस्पेक्टर

पटना-5 के ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार के पास 8 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी है। जिसे इन्होंने खुद, पत्नी, मां, साला और भाई के नाम पर खरीद रखा है। सबसे अधिक प्रॉपर्टी ड्रग इंस्पेक्टर के नाम पर ही पाई गई है। सभी प्रॉपर्टी के कागजात जितेंद्र कुमार के घर से ही बरामद हुए हैं। इस बात का खुलासा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की अब तक की जांच में हुआ है। भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी की टीम ने 25 जून को पटना में सुल्तानगंज स्थित ड्रग इंस्पेक्टर के घर पर छापेमारी की थी। उस दौरान कुल 27 प्रॉपर्टी के पेपर निगरानी के हाथ लगे। इसमें 8 फ्लैट हैं, बाकी जमीन। निगरानी ने एक-एक करके सारे पेपर को खंगाला। जिसमें चौंकाने वाली बात सामने आई। 27 में से 21 प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हो चुकी है। इसमें तीन राज्य, बिहार, यूपी और दिल्ली के 7 शहरों में कुल 11 प्रॉपर्टी अकेले ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार के नाम पर मिली। जो पटना में दानापुर, सुल्तानगंज, जहानाबाद में मखदुमपुर, गया, बोध गया, उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर और दिल्ली में है।

12 प्रॉपर्टी साले और भाई समेत दूसरे रिश्तेदारों के नाम
जितेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी निभा देवी के नाम पर भी दो प्रॉपर्टी खरीद रखी है। इसमें एक पटना के दानापुर में तो दूसरी झारखंड की राजधानी रांची में है। इसी तरह इन्होंने अपनी मां संपूर्णा देवी के नाम पर पटना और गया में प्रॉपर्टी खरीद रखा है।निगरानी मुख्यालय के अनुसार 27 में से 12 प्रॉपर्टी ऐसे हैं, जिसे जितेंद्र के भाई, साला और दूसरे रिश्तेदारों के नाम पर खरीदा गया है। इनमें कई की रजिस्ट्री हो चुकी है। जबकि, कुछ प्रॉपर्टी का एग्रीमेंट पेपर है। अब सवाल यह है कि रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे गए प्रॉपर्टी का पेपर ड्रग इंस्पेक्टर ने अपने पास क्यों रखा था? इस प्वाइंट पर निगरानी की टीम जांच कर रही है।

अकाउंट में 16 लाख तो बीमा पर 19 लाख का इंवेस्ट
ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार के काले कारानामों की पड़ताल लगातार जारी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने उनके बैंक अकाउंट्स को खंगाला है। जिसमें कुल 16 लाख रुपया कैश जमा मिला है।इसी तरह LIC और दूसरी कंपनियों में कराए गए बीमा पॉलिसी की भी जांच हुई। जिसमें करीब 19 लाख रुपए का इंवेस्टमेंट मिला। दरअसल, छापेमारी के दौरान जितेंद्र कुमार के घर से अलग-अलग बैंकों के 8 अकाउंट और बीमा कंपनियों 10 पॉलिसियों के कागजात मिले थे। जिन्हें छापेमारी के बाद खंगाला गया।

सरकार को झांसे में रखा
जितेंद्र कुमार साल 2012 में बिहार सरकार की नौकरी में आए थे। अब तक इनकी नौकरी को करीब 10 साल हो चुका है। सैलरी के रूप में इनकी कुल कमाई 60 लाख रुपए ही है। मगर, जब निगरानी का छापा पड़ा तो कुल 160 प्रतिशत आय से अधिक संपत्ति का पता चला।छापेमारी के दरम्यान ही टीम ने इनके घर से 4 करोड़, 11 लाख 79 हजार 700 रुपया कैश बरामद किया था। इसके अलावा 36.48 लाख रुपए से अधिक के कीमत की करीब पौन किलो सोना, 1.66 लाख रुपए से अधिक के कीमत की तीन किलो चांदी बरामद हुई थी।

अब सवाल ये है कि इनके पास इतनी संपत्ति आई कहां से? सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को हर साल अपनी संपत्ति का डिटेल राज्य सरकार को देना पड़ता है। जब इनकी कुंडली को खंगाला गया तो सरकार के साथ किए गए फर्जीवाड़े का भी पता चला। इन्होंने राज्य सरकार को भी झांसे में रखा। करोड़ों की संपत्तियों की जानकारी को छीपा कर रखा।

फार्मासिस्ट की डिग्री बेचते गए
लगातार सवाल यह उठ रहा है कि एक गजटेड अफसर के पास इतनी संपत्ति आई कहां से? जितेंद्र कुमार ने कहां से और कैसे इतनी कमाई की? सवालों के जवाब निगरानी के अधिकारी भी जानना चाहते हैं। इसके लिए वो जितेंद्र कुमार को नोटिस भी दे चुके हैं।सामने आकर आमदनी का जरिया बताने को कह रहे हैं। मगर, ड्रग इंस्पेक्टर लगातार गायब हैं। इस कारण निगरानी ने उनके डिपार्टमेंट को भी एक लेटर लिखा है। पर सूत्र बता रहे हैं कि सबसे बड़ा खेल जितेंद्र कुमार ने फार्मासिस्ट की डिग्री में किया है।

बिहार कॉलेज ऑफ फार्मेसी में जितेंद्र कुमार बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में मेंबर हैं। सूत्र का दावा है कि वो कॉलेज उनका अपना है। इस कॉलेज के जरिए उन्होंने बड़े स्तर पर अवैध कमाई की है। जो लोग फार्मासिस्ट बनने के पैमाने को पूरा नहीं कर पा रहे थे, उन्हें भी मोटी रकम लेकर उसकी डिग्री दी गई है।

हर एक डिग्री के लिए 5 लाख या इससे अधिक का खेल खेला। इसके अलावा पटना-5 के तहत पटना स्टेशन से लेकर अगमकुआं तक के मेडिकल शॉप आते हैं। इनमें से कई ऐसे मेडिकल शॉप हैं, जहां कई प्रकार के खेल चलते हैं। सब कुछ जानने के बाद भी ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार इनके उपर मेहरबान रहे। इसके एवज में उन्हें हर महीने तय रकम मिल जाया करती थी।

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