पटना से लेकर देवघर तक जिस कलाकार की कला- साधना प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में दिख रही, वह पटना आर्ट कॉलेज से आर्ट की डिग्री हासिल करने वाले कलाकार अमृत प्रकाश साह द्वारा बनाई गई है। वे झारखंड के साहेबगंज के मूल निवासी हैं लेकिन रहते पटना में हैं।

पटना के विधान सभा भवन कैंपस में तैयार 40 फीट ऊंचे शताब्दी स्मृति स्तंभ का डिजाइन अमृत प्रकाश ने ही तैयार किया है। इसे अरुण पंडित और राजस्थान के पत्थर कारीगरों ने रुप दिया है। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने इसके डिजाइन वाले मॉडल का लोकार्पण किया था।

इस शताब्दी स्तंभ में 243 पत्ते हैं जो विधान सभा में विधायकों के संख्या बल को दर्शाते हैं। स्तंभ को ब्रॉन्ज से तैयार किया गया है। पीपल पेड़ की ऊंचाई 15 फीट है। इस शताब्दी स्मृति स्तंभ का उद्घाटन पीएम नरेन्द्र मोदी करेंगे। अमृत ने काफी समय अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार हिम्मत शाह के साथ काम किया है।

इन चार महिलाओं की मूर्तियों के बारे में जानिए
अमृत शाह की बनी कला कृतियों से देवघर का नवनिर्मित एयरपोर्ट भी सजाया गया है। इनके बनाए चार स्कल्पचर को हवाई अड्डा के वीआईपी लॉज में सजाया गया है। ये चारों स्कल्पचर झारखंड की संस्कृति और उसके ग्रामीण परिवेश को दिखाते हैं। ये चार देवियां हैं जिन्हें गोल्डेन लेडी, टार्जन लेडी, संताल वूमेन और भक्तिनी का नाम दिया गया है।

इन मूर्तियों की फोटो पीएम मोदी ने ट्विटर पर डाला है। टार्जन लेडी पद्मश्री विजेता जमुना टुडू की प्रतिकृति है। इन्हें झारखंड के लोग टार्जन लेडी के नाम से जानते हैं। जमुना टुडू ने झारखंड के जंगल को बचाने के लिए काफी काम किया है। तीसरी लेडी संताल ट्राइवल संस्कृति को नजदीक से दिखाती है। इसमें झारखंड के लोकपर्व सोहराय की झलक मिलती है।

चौथी लेडी जिस भक्तितनी की है वह कृष्णा बम है। कृष्णा वह डाक बम है जो हर साल दौड़कर देवघर पूजा करने जाती है। कृष्णा, मुंगेर की रहनेवाली है। इन चारों देवियों की मूर्तियां गांव के घरों में अनाज रखने वाले कोठी के आकार की है।

बिरसा मुंडा और बाबाधाम मंदिर का मोमेंटो
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बिरसा मुंडा से जुड़ा मेमेंटो और बाबाधाम मंदिर का मोमेंटो सौपा जाएगा। इसे भी अमृत प्रकाश ने बनाया है। भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि फाइववर, रेजिन, मार्बल डस्ट और पीतल डस्ट से तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री जिस वीआईपी जोन में बैठेंगे वहां दो नृत्य करती आदिवासी महिलाओं की मूर्तियां भी होंगी। इसे भी अमृत ने ही बनाया है। अमृत कहते हैं उन कलाकृतियों को बनाने में उन्होंने अपने कला साधना की पूरी ताकत लगा दी है।

अमृत प्रकाश साह ने पटना आर्ट कॉलेज से पढ़ाई की
अमृत प्रकाश साह ने पटना के आर्ट कॉलेज से 2012 में बीएफए किया था। कोलकाता के रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय से फाइन आर्ट में एमएफए किया। इनके पिता ओम प्रकाश साह और मां भुवन देवी साहेबगंज में रहते हैं। झारखंड की संस्कृति पर इन दिनों काफी काम कर रहे हैं। इन्होंने इससे पहले पटना के मुख्यमंत्री आवास में बिहार द्वार बनाया है। बिहार दिवस पर गांधी मैदान में पांच हाथ एक दूसरे को पकड़े हुए इन्होंने बनाया था। उसकी काफी चर्चा हुई थी। अमृत ने जिन बड़े कलाकारों के साथ काम किया उनसे हिम्मत शाह नाम भी है। वे कहते हैं कि जिन कलाकारों से मैंने सीखा है उन सब का प्रयोग मूर्तिकला में कर रहा हूं।