शिक्षकों के ड्रेस पर अफसरों ने उठाए सवाल:वैशाली डीईओ ने शिक्षकों के कुरता- पायजामा, जींस पर रोक लगाई

वैशाली : शिक्षकों के द्वारा स्कूलों में पहनने वाले कपड़े को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। स्कूलों में शिक्षकों का कोई ड्रेस कोड नहीं है लेकिन विवाद तब खड़ा हो गया जब वैशाली जिला के डीईोओ ने वहां के सभी बीईओ और सभी प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापकों को एक पत्र लिखा।

कुर्ता-पायजामा पहनकर स्कूल आने पर फटकार लगाते लखीसराय के डीएम। - Dainik Bhaskar

पत्र में क्या कहा है पढ़िए

13 जुलाई को लिखे पत्र में वैशाली जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा है कि ‘ प्रायः सोशल मीडिया में विद्यालय में पठन-पाठन की अवधि में शिक्षकों द्वारा कुर्ता- पायजामा, जींस- टीशर्ट आदि पहन कर कक्षा संचालन करने से शिक्षकों की एक नकारात्मक छवि प्रदर्शित हो रही है। उल्लेखनीय है कि शिक्षकों की समाज निर्माण एवं छात्र-छात्राओं के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका होती है। वह न केवल विद्यालय में बल्कि विद्यालय अवधि के बाद भी छात्र छात्राओं के लिए मेंटर की भूमिका में होते हैं। इसलिए आप सभी से अनुरोध है कि आप अपने क्षेत्रान्तर्गत कार्यरत शिक्षकों को विद्यालय की अवधि के दौरान फॉर्मल पैंट, फूल स्टैब या हाफ स्लैब शर्ट आदि में विद्यालय में पठन- पाठक का कार्य करें ताकि उनकी सौम्यता और शिष्टता बच्चों के लिए भी अनुकरणीय बन सके। कृपया इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।’ बता दें कि इससे पहले लखीसराय के डीएम ने एक स्कूल के प्रधानाचार्य को कुर्ता -पायजामा में आने पर फटकार लगायी थी। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।

कुर्ता- पायजामा को शालीन नहीं मानना भारतीय संस्कृति का अपमान- अमित विक्रम

शिक्षक संघों ने शिक्षकों के ड्रेस को लेकर जारी पत्र पर अपना प्रतिक्रिया जारी की है आदेश की आलोचना की है। टीईटी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित विक्रम ने कहा कि जब शिक्षकों को ड्रेस के लिए अलग से कोई भत्ता नहीं मिलता है और न ही शिक्षा विभाग की ओर से कोई ड्रेस कोड लागू किया है, ऐसे में वैशाली डीईओ का आदेश मनमानापूर्ण है। कुर्ता- पायजामा को शालीन ड्रेस नहीं मानना भारतीय संस्कृति का अपमान है। इसको लेकर संघ विभाग के वरीय पदाधिकारियों से बात करेगा और मनमानापूर्ण आदेश देने वाले पर अफसर पर कार्रवाई की मांग करेगा। संघर्षशील शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि शिक्षक को सम्मानपूर्ण कपड़े पहनकर विद्यालय में आना चाहिए। कपड़ा व्यक्तित्व का आईना होता है इसलिए शिक्षकों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए।

ड्रेस कोड से ही शिक्षा में सुधार हो जाएगा तो सरकार वही करे और उसके लिए राशि भी जारी करे-मार्कण्डेय पाठक

टीईटी-एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने कहा कि शिक्षकों के ड्रेस को लेकर जो वैशाली में पत्र जारी किया गया है वह अलोकतांत्रिक है और अफसरशाही प्रवृत्ति को दर्शा रहा है। सरकार की ओर से शिक्षकों के लिए कोई ड्रेस कोड नहीं है, न सरकार इसके लिए राशि देती है। इस मुद्दे पर सरकार को शिक्षक संघों से बात करनी चाहिए। ड्रेस कोड ही लागू करना है तो सरकार उसके लिए राशि दे। शिक्षकों को सरकार नौकर समझ रही है। ऐसे अफसरों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जो मनमानापूर्ण आदेश लागू कर रहे हैं। ड्रेस कोड लागू करने से ही शिक्षा में गुणवत्ता में सुधार हो जाएगा तो सरकार वही करे और उसके लिए राशि भी जारी कर दे। सरकार शिक्षकों के प्रति सम्मान को नष्ट करने में लगी है। समाज में शिक्षकों को नीचा दिखाया जा रहा है और मनोबल टूट रहा है।

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