बगहा अनुमंडल के 95% आबादी कृषि पर निर्भर:1 किलो धान उगाने में 3 से 4 हजार लिटर लगता है पानी, सूखे जैसे हालात से खेतो में पड़ने लगे दरारे

बगहा के 95% आबादी कृषि पर आधारित है। ऐसे में बारिश का दगा दे जाना किसानों के लिए परेशानी खड़ा कर दिया है। सावन का महीना किसानों के लिए सबसे अच्छा महीना माना गया है। इस महीने की बारिश धान और गन्ने के फसल के लिए वरदान सिद्ध होती है।

लेकिन अब तक बारिश का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं। सूखे जैसे इस हालात से किसान काफी चितित हैं। खेतों में किसानों ने जैसे-तैसे पानी भरकर धान की रोपानी तो कर दिया था। लेकिन अब उसमें दरारें पड़ गई है। पौधों के सूखकर नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही 30 प्रतिशत खेत पानी के अभाव में खाली पड़े हैं।

उनमें रोपाई नहीं हो पा रही है। किसानों के माने तो पंपसेट से रोपनी करने में काफी खर्च हो रही है। किसी तरीके से किसानो ने रोपनी कर भी लिया है तो अब बिचड़े को बचाने के लिए पंपसेट सेट सिंचाई नहीं कर पा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक पंकज मलकानी ने बताया कि 1 किलो धान उपजाने के लिए 3 से 4 हजार लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है, जो बारिश से ही संभव हो पाता है।

जून माह में धान की बुवाई शुरू हो गई थी। समय से मानसून की इंट्री भी हो गई थी। किसानों के चेहरे पर खुशी दिख रहे थे। लेकिन मॉनसून की एंट्री 2 दिनों तक है बारिश करा पाई। फिर उसके बाद आधा जुलाई जाने के बाद भी बारिश का नामोनिशान देखने को नहीं मिला। कुछ किसानों ने पौधों को सूखने से बचाने के लिए डीजल डालकर इंजन से सिचाई भी शुरू कर दी है, लेकिन तेल के दाम आसमान पर होने से खेती की लागत काफी बढ़ जा रही है। ऐसे में कई किसान इंजन से सिचाई करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading