मुजफ्फरपुर। नवनियुक्त शिक्षकों के सीटीईटी सर्टिफिकेट की जांच नए सिरे से होगी। अगर इसमें गड़बड़ी पाई जाती है या डिग्री अमान्य या फर्जी है तो उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराते हुए राशि वसूली की दिशा में कार्रवाई होगी। डीपीओ स्थापना की ओर से इसको लेकर जांच कराई जाएगी। दूसरी ओर नवनियुक्त शिक्षकों के सर्टिफिकेट की जांच के लिए दो बार कमेटियों का गठन किया गया है।
लेकिन अब तक जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। जिले से बाहर के संस्थान और राज्य के बाहर के संस्थानों से जारी सर्टिफिकेट की जांच के लिए फंड बाधा बन रहा है। बताया गया है कि पिछले दिनों बीईओ की ओर से सर्टिफिकेट जांच के लिए 80 हजार रुपए एडवांस के रूप में मांगा गया था। लेकिन निदेशालय की ओर से अब तक सर्टिफिकेट जांच के लिए कोई शुल्क उपलब्ध नहीं हो पाने से परेशानी हो रही है।
दूसरी ओर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से भी सर्टिफिकेट जांच के लिए प्रति अभ्यर्थी डेढ़-दो सौ रुपए की मांग की जा रही है। इसकी जानकारी भी निदेशालय को दी गई है। डीपीओ स्थापना डॉ. प्रफुल्ल कुमार मिश्र ने बताया कि सर्टिफिकेट की जांच की जिम्मेदारी बीईओ को दी गई है।
निदेशालय स्तर से इस दिशा में कंटीजेंसी की बात रखी जाएगी। सत्यापन के लिए दिए जाने वाले सर्टिफिकेट में बिहार बोर्ड की ओर से शुल्क की मांग की जा रही है। इस कारण से भी सत्यापन का काम लंबित है। उल्लेखनीय है कि नवनियुक्त 2434 शिक्षकों में से अब तक 351 के सर्टिफिकेट का सत्यापन हो सका है।

