सहरसा : बिहार के सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंडवासी हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं। कोशी नदी हर वर्ष कटाव करती है ,और उपजाऊ भूमि सहित खेत खलिहान के साथ घर बार को नदी अपने गर्भ में समाहित करती है। वहीं एक बार फिर सलखुआ प्रखंड के बगेवा में कटनिया तेज हो गया है। बगेवा उतरी भाग में कोशी तेजी से कटाव करती उपजाऊ खेत – खलिहान को नदी में विलीन कर रही है।

कोशी के उग्र कटाव से किसान भयभीत हैं। आंखों के सामने उपजाऊ जमीन में कटाव होता देख किसान परेशान हैं। बगेवा के दर्ज़नो ग्रामीण व किसानों ने बताया कि इसी जमीन को उपजा कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। जहां धान की फसल बारिश नहीं होने से सुख रही है व भूमि फट रही है। जिससे इस बार उपज की आश छोड़ चुके हैं। वहीं अब उपजाऊ भूमि भी कट जाएगी तो घर बार व परिवार का गुजारा करना मुश्किल होगा।

वहीं बगेवा गांव के बिजेंद्र यादव ग्रामीणों की माने तो की बगेवा के बिजेन्द्र यादव, इस गांव के साथ सौतेलापन व्यवहार किया जा रहा है। जिस कारण अबतक कटाव निरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ है। जबकि पहले भी कटाव के बारे में ध्यानाकृष्ट कराये जाने के लिए पत्राचार के बाबजूद प्रशाशन व विभाग को कटाव की जानकारी होते हुए भी कटाव निरोधक कार्य अब तक नहीं किया जा रहा है।

वहीं उन्होंने बताया कि कोशी नदी पहले गांव से करीबन 7 से 8 किलोमीटर दूर बहती थी लेकिन धीरे धीरे काटते-काटते अचानक उग्र रूप वर्ष 2017 में ली और आधा गांव से अधिक बगेवा को अपने गर्व में समाकर यहां तक आ गई है।दरअसल कोशी नदी के कटान की वजह से आधा से अधिक गांव बगेवा नदी के किनारे गांव के सैकड़ों लोगों के खेत हैं जिसमें अभी धान रोपाई का की गई है व भी कटाव की जद में आ गया है जिससे किसान परेशान हैं।



