मुजफ्फरपुर। सावन माह की अंतिम सोमवारी पर एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। महाकालेश्वर के स्वरूप वाला कांवर देखकर लोग उत्साहित हो उठे। हर कोई इसके दर्शन करने को बेकाबू हो रहा था। कांवर पर महाकालेश्वर का स्वरूप था। वहीं गुंबद का स्वरूप देवघर बाबा वैधनाथ धाम का था। ये दोनों स्वरूप देखकर भक्त हर हर महादेव के नारे लगाने लगे।
दरअसल, कांवरियों का जत्था पहलेजा घाट से जलबोझी कर बाबा गरीबनाथ पर जलाभिषेक करने पहुँचा था। प्रत्येक वर्ष ये जत्था बाबा पर जलाभिषेक करते हैं। यह कांवर 51 फीट का है। इसमें करीब 250 भक्त होते हैं, जो बारी-बारी से कांवर उठाते हैं और आगे बढ़ते हैं। शुक्रवार को पहलेजा घाट से जलबोझी करने के बाद निकले थे।
भक्त कुंदन कुमार ने बताया कि बाबा की असीम कृपा है। भीषण गर्मी में जलबोझी कर चले थे। लेकिन, कांवर उठाते ही धूप, गर्मी सब भूल गए। बोलबम के नारे लगाते आगे बढ़ते रहे। भक्त नाचते-गाते बाबा नगरी तक पहुंचे। जहां-जहां से ये कांवर यात्रा गुजरा। भक्तों की भीड़ दर्शन करने को उमड़ पड़ी। हर हर महादेव के नारे लगने लगते थे। हर कोई सेल्फी लेने को बेकाबू हो रहा था।
कांवरियों ने बताया कि प्रत्येक वर्ष कांवर लेकर आते हैं। हर बार भगवान भोले शंकर का अलग-अलग स्वरूप बनाते हैं। कभी उज्जैन तो कभी रामेश्वरम का स्वरूप बनाते हैं। पहलेजा घाट से 85 किलोमीटर की यात्रा तय कर बाबा नगरी तक पहुंचते हैं। पैर में छाले पड़ जाते हैं। लेकिन, कदम नहीं रुकते हैं। बाबा की भक्ति में मग्न होकर नाचते-गाते पहुंच जाते हैं।

