भोजपुर। पहाड़ों में लगातार बारिश से मैदानी इलाकों की नदियां उफान पर हैं। गंगा और यमुना का लगातार जल स्तर बढ़ने से बिहार के भोजपुर में गंगा नदी ख’तरे के नि’शान के पास पहुंचने वाली है। नदी का पानी अब भोजपुर जिले के बड़हरा और शाहपुर के निचले इलाको में फै’लना शुरू हो गया है।
गंगा और सोन के तटवर्ती इलाके में जलस्तर काफी ते’जी से बढ़ रहा है। जिले के शाहपुर और बड़हरा ब्लॉक के कुछ गांवों में कटाव भी जारी है। सैकड़ों एकड़ खेतों में बाढ़ का पानी फैल चूका है और फसल के साथ-साथ ग्रामीणों को भी बेघर होने का डर सता रहा है। ग्रामीण मजबूरन पलायन करने को मजबूर हैं।
बड़हरा और शाहपुर प्रखंड सहित गंगा नदी से सटे गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ का पानी तटवर्ती इलाके के खेतों में फैलने लगा है। इससे किसानों को फसल नष्ट होने का डर सता रहा है। रविवार की सुबह गंगा नदी का जल स्तर 52.55 मीटर पहुंच गया जोकि खतरे के निशान से महज 0.53 मीटर नीचे बह रही है।
वहीं शनिवार को गंगा नदी का जलस्तर 52.15 मीटर था। शुक्रवार को यह जलस्तर 51.58 मीटर था। पिछले 24 घंटे में 48 सेंटीमीटर की वृद्धि के बाद गंगा नदी अपने खतरे के निशान 53.08 मीटर से महज 0.53 मीटर नीचे बह रही है। शाम तक इसमें और वृद्धि हुई। गंगा नदी के जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो सोमवार तक गंगा नदी अपने खतरे के निशान से ऊपर बहने के आसार हैं जिसके बाद दर्जनों गांव में गंगा के बाढ़ का पानी फैल जाएगा।
बाढ़ का पानी महुली, ख्वासपुर, सिन्हा, नेकनाम टोला समेत अन्य गांवों के निचले इलाकों में फैलने लगा है। वहीं कोईलवर-बक्सर तटबंध पर नेकनाम टोला के पास स्लुइस गेट नहीं लगने के कारण इसका पानी गांव के साथ लौहर फरना, पैगा, हाजीपुर आदि गांवों के बधार में स्थित खेतों में तेजी से फैलने लगा है।
इस कारण किसानों के खेतों में लगी फसल में पानी घुस गया है। स्थानीय ग्रामीण रमेश कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। हम लोग गंगा नदी के उत्तरी छोर से दक्षिणी छोर की तरफ आए हुए हैं उधर दियारा इलाके से खेत खलिहान घर को छोड़ पशुओं और खुद को इस तरफ लेकर पहुंचे हैं।
स्थानीय महिला बुजुर्ग तेतरी कुंवर ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि गंगा के उस तरफ दियारा इलाके में 3 बीघा के खेत में सब्जी उगाई थी। फसल सब गंगा नदी के बाढ़ के पानी में बह गया। गंगा नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। वहीं, बाढ़ पीड़ित गांवों के लोग बाढ़ से बचने की तैयारी में जुट गये हैं। गंगा नदी के सटे गांवों के ग्रामीण अपने-अपने घर में ईंधन के साथ सूखा भोजन, अन्न समेत जरूरी सामान जुटाना शुरू कर दिए हैं।
