मुजफ्फरपुर। एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग को अब प्ले स्कूल की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसमें ओपीडी से लेकर वार्डों तक दीवारों पर मोटू-पतलू, डोरेमन, स्पाइडरमैन व कई ऐसे डिस्प्ले लगाए गए हैं जिन्हें देखते बच्चे खुश हो जाते हैं।
ऐसे में चिकित्सक के लिए उनकी जांच और चिकित्सा आसान होती है। कंपाउंडर व नर्स भी उन्हें खेल-खेल में इंजेक्शन लगा देते हैं। सही मायने में इस ओपीडी को इस तरह से सजाया गया है कि इसका आभास ही नहीं होता कि यह अस्पताल है। यहां पहुंचते लोगों का मन खुश हो जाता है।
सुंदर व आकर्षक ढंग से सजाए गए इस ओपीडी में बच्चों के लिए एंटरटेनमेंट के साथ-साथ पढ़ाई व उन्हें स्वस्थ रखने के उपाय भी चित्रों के जरिए बताए गए हैं। ताकि, परिजन बच्चे की सेहत का ख्याल रखने के तरीके जान सकें।
एसकेएमसीएच प्रशासन ने यह व्यवस्था विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह पर बच्चों को प्ले के तौर पर इलाज की पहल के रूप में की है। चिकित्सा जगत का मानना है कि बच्चे इलाज के दौरान डरें नहीं। इसके लिए उनका मन खेल में रमा रहे, साथ आए परिजन उन्हें डिस्प्ले पर लिखे अक्षर व चित्र दिखाते रहें और डॉक्टर-स्वास्थ्यकर्मी जांच-इलाज करते रहें। इसलिए दीवार पर डिस्प्ले बोर्ड के जरिए पशु-पक्षी, स्पाइडरमैन, डोरेमन, मोटू-पतलू, मानव परिवार, एबीसीडी-कखगघ आदि चित्र बनाए गए हैं।
अधीक्षक डॉ. बाबूसाहेब झा के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों का सुझाव था कि एसकेएमसीएच में अधिक बच्चे ग्रामीण इलाके से आते हैं। वो बच्चे अधिकतर मौसमजनित रोग से ग्रसित या कुपोषित होते हैं। ऐसे बच्चे बीमार होने के दौरान अधिक चिड़चिड़ा हो जाते हैं।
ऐसे में शिशु रोग विभाग को उनके मन के अनुकूल तैयार करने से डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों के लिए इलाज करना आसान होगा। साथ ही परिजन उनका उचित ख्याल रख सकें इसके लिए जरूरी व्यायाम, उपयुक्त रूटीन, उन्हें स्वस्थ रखने के उपाय और नित्यक्रिया से संबंधित सलाह भी बताई हुई है।
