नई दिल्ली: दिल्ली में एक्साइज पॉलिसी स्कैम और वक्फ बोर्ड में हुए घोटाले के बाद अरविंद केजरीवाल सरकार पर अब सरकारी स्कूलों में गेस्ट टीचर की नियुक्ति में धांधली का आरोप लगने का मामला प्रकाश में आया है। मामले को लेकर गुरुवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इंटरनल इनक्वायरी का आदेश दिया है।

जांच के लिए एलजी सचिवालय ने चीफ सेक्रेटरी को एक लेटर लिखा है। इसमें फर्जी गेस्ट टीचर्स के नाम पर सैलरी गबन करने के मामले की भी जांच की जाएगी। शिक्षा निदेशक को लिखे गए इस लेटर में सरकारी स्कूलों में नियुक्त किए गए गेस्ट टीचर्स की फिजिकल अटेंडेंस और सैलरी निकासी की स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट एक महीने के अंदर जमा करने का निर्देश दिया गया है।

नियुक्ति नहीं पर लाखों रुपए सैलरी दे दी गई
दिल्ली में 25 हजार गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी अब सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में किए गए एक ऑडिट में भी हेराफेरी का मामला सामने आया है। इसमें पाया गया कि दिल्ली के मानसरोवर पार्क के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में गेस्ट टीचर्स के नाम पर तीन लोगों को 4 लाख 21 हजार रुपए सैलरी दी गई, जबकि इनकी नियुक्ति इस स्कूल में थी ही नहीं। सक्सेना ने पैसे के गबन के मामले में पिछले हफ्ते ही दिल्ली सरकार के एक स्कूल के चार वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (अउइ) कर रही है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक रामवीर सिंह बिधूड़ी ने उपराज्यपाल से दिल्ली के शिक्षा मॉडल पर श्वेत पत्र जारी करने का निवेदन किया है। बिधूड़ी ने कहा- 1027 सरकारी स्कूलों में से 745 में साइंस-कॉमर्स नहीं पढ़ाई जाती। पिछले सात सालों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में एक लाख की कमी आई है।

एक क्लास में 100 से भी ज्यादा बच्चे हैं, जबकि मानक के मुताबिक, एक क्लास में 40 से ज्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली के 12 कॉलेजों में कई महीनों से शिक्षकों, कर्मचारियों को वेतन ही नहीं मिला। बिधूड़ी ने कहा कि वर्ल्ड क्लास एजुकेशन मॉडल के नाम पर पूरे देश को धोखा देने की कोशिश की जा रही है।




