मुजफ्फरपुर में अ’श्लील गानों का वि’रोध, बैंडवालों ने कहा- शादी-ब्याह में न बजाएंगे, न बजने देंगे

मुजफ्फरपुर. भोजपुरी गीतों में बढ़ती फूहड़ता और अश्लीलता से सभी लोग परेशान हैं. बिहार में शादियों में धड़ल्ले से अश्लील गाने बजते हैं, लेकिन अब इससे तंग आकार मुजफ्फरपुर के छाता बाजार के कुछ बैंड-पार्टी वालों ने निर्णय लिया है कि वो अब शादी-ब्याह में न गंदे गाने बजाएंगे, और न इसे गाएंगे. सट्टा लिखने के वक्त ही बैंडवाले अपने ग्राहकों से यह बात स्पष्ट शब्दों में कह देंगे. मुजफ्फरपुर बैंड मंडी के लोगों ने यह फैसला कर लिया है कि वो इस बार लगन से फरमाइश आने पर भी गंदा गाना नहीं गायेंगे. बैंड पार्टी वालों के इस फैसले की हर ओर तारीफ हो रही है.

मुजफ्फरपुर शहर के बैंड-बाजा कलाकार लग्न में नहीं बजाएंगे अश्लील व फूहड़ गानेशहर के एक बैंड पार्टी संचालक आरिफ़ मसूदी ने कहा कि फूहड़ गाना को गाने में हमें भी शर्म आती है. हम हिंदुस्तान के रहने वाले हैं, हमारे देश की अपनी संस्कृति और सभ्यता है. इस लिहाज से भी गंदे गाने को हमें न गाना चाहिए, और न ही सुनना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें शादियों में मो. रफ़ी, मुकेश कुमार और किशोर दा के गाने गाना और बजाना पसंद है.

गंदे गानों को गाने-बजाने में नज़र नहीं उठा पाते

बैंड मंडी के ही मास्टर वसीम अली ने बताया कि शादियों में गंदे गाने की अधिक फरमाइश ग्रामीण क्षेत्रों में आती है. शहरी इलाकों में गंदे गाने की फरमाइश कम होती है. ग्राहकों की फरमाइश पर हमें गंदे गाना बजाना पड़ता है. इन गीतों को गाने-बजाने में हम अपनी नज़र तक नहीं उठा पाते हैं. ऐसे गाने को बंद कर देना चाहिए. ऐसे फूहड़ और अश्लील गानों की आज बाजार में भरमार है जिन्हें सुनकर शर्म आती है.

बैंड पार्टी वालों के दर्जनों परिवार 100 साल से यहां रह रहे 

दरअसल मुजफ्फरपुर में यूपी वालों की बैंड पार्टी बहुत प्रसिद्ध है. मुजफ्फरपुर के छाता बाजार इलाके में उत्तर प्रदेश से आए बैंड पार्टी वालों के दर्जनों परिवार तकरीबन 100 साल से रह रहे हैं. बैंड मंडी के निवासी आरिफ़ मसूदी बताते हैं कि हमारे पूर्वज लगभग 100 साल पहले बिहार के मुजफ्फरपुर आए थे, तभी से हम इस शहर की शादियों की रौनक बढ़ा रहे हैं.

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