गया. ज़िले का बोधगया क्षेत्र गेंदा फूल की खेती से गुलजार हो रहा है और इस इलाके के किसानों को परंपरागत फसलों की तुलना में तीन गुना मुनाफा हो रहा है. सालों से इस इलाके में बड़े पैमाने पर गेंदा फूल की खेती की जाती रही है, जिसे स्थानीय मार्केट बोध गया तथा गया शहर में आसानी से बेच दिया जाता है. बोधगया के महाबोधि मंदिर में 3 क्विंटल तथा गया के विष्णुपद मंदिर में भी 3 क्विंटल गेंदे के फूल से पूजा की जाती है.
गया तथा बोधगया के मंदिरों को सजाने के लिए रोजाना लगभग 8 क्विंटल गेंदे के फूल मंगाए जाते हैं. ऐसे में गया का धार्मिक स्थल किसानों के लिए रोज़गार का अवसर दिया है. मंदिर के प्रयोग में आने वाले हजारों किलो फूल इन्हीं किसानों के खेत से मंगाए जाते हैं. बोधगया के बकरौर गांव के आधा दर्जन किसान इसकी खेती 15 साल से अधिक समय से कर रहे हैं और बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं.
कोलकाता के फूलों पर निर्भरता घटी
विष्णुपद और महाबोधि मंदिर में प्रयोग होने वाले गेंदा फूल को कभी कोलकाता के बाज़ारों से मंगाया जाता था. अब स्थानीय किसानों की मेहनत रंग ला रही है और ज़िले के किसान मंदिर की ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं और कोलकाता के फूलों पर निर्भरता यहां के किसानों ने कम कर दी है. ज़िले के किसान गेंदा फूल की खेती कर कोलकाता की फूल मंडी को भी चुनौती दे रहे हैं. फूल की खेती में समय के साथ कम पूंजी भी लगती है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है. बिना सरकारी सहायता के किसान मेहनत की बदौलत खेतों में फूल उगा रहे हैं.

एक कट्टे में 8000 तक का मुनाफा
बोधगया के बकरौर गांव के रहने वाले किसान बब्लू कुमार मालाकार बताते हैं कि 8 कट्टे में फूल की खेती कर रहे हैं. एक कट्ठे में 7 से 8 हजार की आमदनी हो जाती है. महीने में पांच से छह बार फूल तोड़ा जाता है. हर बार 40 किलो तक गेंदा फूल निकलता है. गेंदा फूल को खुद व्यापारी 30-40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से थोक में खेत से ले जाते हैं.



