पटना : अब निजी हॉस्पिटल् और क्लीनिक को भी इलाजरत यक्ष्मा यानी टीबी रोगियों का निक्षय पोर्टल पर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके लिए उन्हें अन्य स्टेक होल्डर की तरह प्रति पंजीयन 500 रुपये दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को कार्यशाला का आयोजन कर योजना की जानकारी संबंधितों को दी। डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व की एक तिहाई आबादी में इस रोग का संक्रमण पाया जाता है।
प्रति एक सेकंड एक नया व्यक्ति इससे संक्रमित होता है। इसकी भयावहता को देखते हुए विश्व स्वास्थ संगठन ने 2030 तक रोगियों की संख्या 2015 के मरीजों की संख्या के 20 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा है। इसके विपरीत केंद्र सरकार ने 2025 तक देश से यक्ष्मा उन्मूलन का संकल्प लिया है और प्रयासरत है।
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, यक्ष्मा डा. बाल कृष्ण मिश्र ने संबंधित अधिकारियों तथा सहयोगी संस्थाओं को निर्देश दिया है कि केंद्रीय यक्ष्मा विभाग द्वारा वर्ष 2022 में राज्य में प्राइवेट सेक्टर का कुल नोटिफिकेशन का लक्ष्य एक लाख 20 हजार रखा गया है,
जबकि सितंबर 2022 तक राज्य में कुल प्राइवेट सेक्टर का नोटिफिकेशन 60 हजार 656 हुआ है एवं शेष 59,344 का नोटिफिकेशन दिसंबर तक पूरा करना है।
पटना जिले में प्राइवेट सेक्टर द्वारा वर्ष 2022 में 19 हजार 900 नोटिफिकेशन का लक्ष्य रखा गया है जबकि सितंबर 2022 तक कुल 13 हजार 464 मरीजों का नोटिफिकेशन किया गया है जो लक्ष्य का 68 प्रतिशत है। वर्ष के अंत तक जिले में प्राइवेट सेक्टर द्वारा अभी 6 हजार 436 मरीजों का नोटिफिकेशन किया जाना शेष है। यूं तो बीमारियां लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर शरीर पर असर दिखाती है।
लेकिन, ज्यादातर बीमारियां अनदेखी के कारण भयानक रूप ले लेती हैं। इन्हीं बीमारियों में से एक है ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) जो हवा में तैरते ड्रॉपलेट्स के माध्यम से एक मरीज से दूसरे मरीज में संक्रमित होता है। यह मुख्य रूप से माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस से जीवाणु से फैलता है। यह आम तौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है, किंतु यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र, संचार तंत्र, मूत्रजनन तंत्र, हड्डियां, जोड़ यहां तक की त्वचा को भी प्रभावित करता है। यदि इसका इलाज नहीं मिले तो आधे से अधिक रोगी काल का ग्रास बन जाते हैं।
