एमफिल के रेगुलेशन की उड़ाई धज्जियां, मनमाने तरीके से कमेटी का गठन कर बड़े स्तर पर खेल की चल रही तैयारी

मुजफ्फरपुर :  बीआरए बिहार विश्वविद्यालय राजभवन के बनाए नियमों को नहीं मानता। यह बार-बार हो रहा है। ताजा मामला एमफिल परीक्षा से जुड़ा है। यहां राजभवन के ला अफसर आरवीएस परमार की ओर से जारी एमफिल के रेगुलेशन की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

एक ओर राजभवन की ओर से 21 सितंबर 2017 को जारी इसी रेगुलेशन से वर्तमान में एमफिल की परीक्षा ली जा रही है। वहीं इसके बिंदु 11 में वर्णित डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी व रिसर्च एडवाइजरी कमेटी के गठन की नियमावली से इतर मनमाने तरीके से कमेटी का गठन कर बड़े स्तर पर ‘खेल’ की तैयारी चल रही है। इसमें कई ऐसे सदस्यों को आयातित कर इंट्री दिलाई गई है़, जो नियम के अनुसार इस कमेटी के सदस्य बन ही नहीं सकते।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.आरके ठाकुर की ओर से 23 सितंबर को जारी पत्र में रिसर्च एडवाइजरी काउंसिल कमेटी के गठन की जानकारी दी गई थी। इस कमेटी में संकायाध्यक्ष को कमेटी का अध्यक्ष, सभी विभागाध्यक्ष/समन्वयक/वरीय प्राध्यापक को सदस्य बनाया गया है।

नियम के अनुसार पीजी विभागाध्यक्षों को उपाध्यक्ष के रूप में शामिल किया जा सकता है। वहीं समन्वयक और वरीय प्राध्यापक को शामिल करने का प्रविधान नियमावली में नहीं है। इसके अतिरिक्त कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक को सदस्य के रूप में कमेटी में शामिल किया गया है।

रेगुलेशन में इसका भी जिक्र नहीं है। वहीं सबसे बड़ा मामला कि दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के प्रशासनिक पदाधिकारी को कमेटी का सदस्य सचिव बनाया गया है। यह पूरी तरह से नियम के विरुद्ध है। विश्वविद्यालय के जानकार और कई पदाधिकारियों ने भी इसपर आपत्ति जताई, लेकिन कार्रवाई की जद में आने के भय से सामने नहीं आए।

दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में एमफिल कोर्स में 2014-15 व 2015-16 में दाखिला लिया गया था। उस समय डिस्टेंस मोड में नामांकन हुआ था। बाद में रेगुलेशन नहीं होने पर राजभवन ने कोर्स के संचालन पर रोक लगा दी। जब अभ्यर्थी हाईकोर्ट गए तो वहां से निर्देश दिया गया कि इनकी परीक्षा ली जाए।

शर्त तय की गई थी कि कोर्स रेग्युलर मोड में चलेगा। इसके बाद पीजी विभागों में इस कोर्स की कक्षाएं संचालित की गईं। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब कोर्स का रेग्युलर मोड में संचालन हुआ तो फिर से दूरस्थ शिक्षा निदेशालय इसमें हस्तक्षेप क्यों कर रहा है। इसका जवाब पदाधिकारियों के पास भी नहीं है।

कुलसचिव डा.आरके ठाकुर से जब इस मामले में मिलकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि संबंधित से पूछकर बताएंगे। जबकि, पत्र उन्होंने ही जारी किया है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति डा.हनुमान प्रसाद पांडेय ने कहा कि नियम सभी के लिए समान है। यदि राजभवन की ओर से जारी रेगुलेशन के आधार पर कोर्स संचालित हो रहा है तो उसके नियमों का पालन करना चाहिए। इस संबंध में संबंधित पदाधिकारी से पक्ष लिया जाएगा। गड़बड़ी सामने आई तो कार्रवाई भी होगी।

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