बेगूसराय. नीति आयोग की डेल्टा रिपोर्ट में बिहार के नंबर वन अस्पताल का तगमा लिए बेगूसराय के सदर अस्पताल में अमानवीय पहलू देखने को मिला है. अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही का एक मामला उजागर हुआ है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार को मामले की जानकारी हुई है. हालांकि मुजफ्फरपुर न्यूज़ इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है. मरीज के परिजनों ने डॉक्टर पर सही से इलाज करने के बजाय रेफर करने का आरोप लगाया है.
दरअसल यह मामला तब उजागर हुआ, जब शोकहारा से 7 माह की गर्भवती महिला मरियम खातून को उसके परिजन इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे. इस दौरान आपातकाल सेवा में एक भी चिकित्सक सदर अस्पताल में उपस्थित नहीं था. इतना ही नहीं यहां तैनात जीएनएम मरीज को छूने के लिए भी तैयार नहीं हुए और परिजनों से कह दिया कि यह मर जाएगी. इसे इलाज के लिए निजी क्लीनिक ले जाइए. इसके बाद परिजनों के सामने अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई कि क्या करें और क्या न करें.
अस्पताल प्रबंधक में गर्भवती महिला को आईसीयू में कराया भर्ती
इस दौरान कुछ लोगों ने परिजनों से स्थिति की जानकारी ली, तो वे काफी हताश नजर आए. इसके बाद घटना की सूचना अस्पताल प्रबंधक को दी गई. साथ ही आपातकाल स्थिति में जब चिकित्सक की खोजबीन रूम नंबर 12 में की गई, तो एक भी चिकित्सक उपस्थित नहीं था. पड़ताल करने पर पता चला कि डॉ. राजीव रंजन की ड्यूटी लगी थी, लेकिन उन्होंने आपसी सहमति से डॉ. मनमोहन चौधरी को ड्यूटी करने के लिए राजी किया था और वे भी आपातकालीन ड्यूटी से गायब थे. इस वजह से इमरजेंसी में इलाज के लिए आने वाली गर्भवती महिला को देखने वाला कोई नहीं था. इधर मामले की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रबंधक ने मरियम खातून को आईसीयू में भर्ती कराया है.
स्वास्थ व्यवस्था पर उठ रहा है सवाल
बिहार का नंबर वन अस्पताल होने के बावजूद बिना इलाज किए मरीज को रेफर करने का आरोप स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है. हालांकि सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि वायरल वीडियो के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है. इसकी जांच की जा रही है.






