बिहार में ये कैसी बहार! उद्घाटन से पहले ही गंडक नदी में बहा 14 करोड़ की लागत से बना पुल

बेगूसराय. इस वक्त बिहार के बेगूसराय जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है जो ना सिर्फ सरकारी तंत्र पर भ्रष्टाचार का मुहर लगा रही है बल्कि आम लोगों की परेशानी की कहानी भी बयां कर रही है. दरअसल शाहेबपुर कमाल प्रखंड के विष्णुपुर आहोक के समीप गंडक नदी पर बना पुल आज सुबह एकाएक टूटकर नदी में विलीन हो गया. गौरतलब है कि विष्णुपुर आहोक एवं साहेबपुर कमाल को जोड़ने वाली यह अकेला पुल था साथ ही साथ इस पूल के सहारे बेगूसराय जिले के बखरी, गढ़पुरा एवं मुंगेर जिले के कुछ इलाकों के साथ-साथ खगरिया जिला के लोग भी आवागमन करते थे. अब यहां के आम लोग एक बार फिर नाव के सहारे आर पार करने को विवश हो रहे हैं.

बेगूसराय के शाहेबपुर कमाल प्रखंड के विष्णुपुर आहोक के समीप गंडक नदी पर बना पुल टूटकर नदी में विलीन हो गया.

दरअसल शाहेबपुर कमाल प्रखंड के समीप विष्णुपुर आहोक गंडक घाट पर बना पुल आज ध्वस्त हो गया. मिली जानकारी के अनुसार तकरीबन 206 फुट लंबी एवं 8 फुट चौड़ी इस पूल को बनाने मे 14 करोड़ खर्च किए गए थे और वर्ष 2017 से इस पर परिचालन शुरू किया गया था. हालांकि एप्रोच पथ के अभाव में अभी तक इस पुल का ना तो विधिवत उद्घाटन हुआ था और ना ही इस पर कोई बड़ी गाड़ियां चल रही थी. लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो इस पर लोकल ट्रैक्टर एवं अन्य गाड़िया जरूर गुजरती थी. साथ ही साथ पैदल आवागमन भी किया जाता था.

14 करोड़ का पुल 14 महीने भी नहीं चल सका 

मिली जानकारी के अनुसार पिछले 2 महीनों से इस पुल में दरार आनी शुरू हुई थी. लेकिन लोगों का परिचालन अनवरत जारी था और आज सुबह एकाएक यह पुल पाया नंबर दो और तीन के बीच से टूटकर नदी में विलीन हो गई. गनीमत यह रही कि उस वक्त पुल पर कोई बड़ी गाड़ी या लोग मौजूद नहीं थे नहीं तो बड़ा नुकसान हो सकता था. अब यहां सवाल उठाने लगे हैं कि 14 करोड़ की लागत से बना यह पुल 14 महीने तक भी लोगों को सुविधा नहीं मिल पाई जो कहीं ना कहीं पुल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही है.लोगों के माने तो उक्त पुल के निर्माण में लगी कंस्ट्रक्शन कंपनी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के घालमेल की वजह से इसके निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी की गई.

’32 की जगह 8 एमएम के सरिया का हुआ इस्तेमाल’

लोगों का कहना है कि पुल में कम से कम 32 एमएम के छड़ का प्रयोग होता है लेकिन इस पुल के निर्माण में मात्र 8 एमएम के सरिया का प्रयोग किया गया था. साथ ही साथ सीमेंट के प्रयोग में भी लापरवाही बरती गई थी. फिलहाल पुल गिरने की वजह जो भी हो लेकिन अब स्थानीय लोगों के लिए यह एक बड़ा परेशानी का सबब बन चुका है और लोग एक बार फिर नाव के सहारे गंडक आर पार करने को विवश है. हालांकि पूल गिरने के बाद स्थानीय स्तर पर पदाधिकारी पहुंचकर पुल के दोनों तरफ से वेरी कटिंग लगा चुके हैं एवं यातायात पूरी तरह बाधित कर दी गई है.

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