पटना : राज्य सरकार ने मदरसों की संबद्धता स्वीकृत करने, विभाग के अनुमोदन के पश्चात इस संबंध में नियमावली बनाने तथा प्रस्वीकृति के लिए निर्धारित मानक पूरा नहीं करने पर प्रस्वीकृति वापस लेने की शक्ति बिहार राज्य मदरसा बोर्ड को सौंप दी है।
इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर अधिसूचित नियमावली को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश बोर्ड को दिया गया है। मदरसों को अनुदान की श्रेणी में लाने के लिए अनुशंसा के अधिकार भी बोर्ड को दिए गए हैं। निर्धारित प्रविधानों के तहत बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड में शिक्षा विभाग के पूर्वानुमोदन से नियुक्ति होगी।
यदि आवश्यक हुआ तो मदरसा बोर्ड वर्ग-तीन के पद पर नियुक्ति हेतु बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग से अनुरोध कर सकेगा। मदरसा बोर्ड अपने कर्मियों के सेवा शर्त एवं कार्यालय के संचालन के लिए भी नियमावली तैयार करेगा, जिसका अनुमोदन उसे शिक्षा विभाग से लेना होगा।
नई नियमावली के तहत अब 70 वर्ष से अधिक उम्र वाले बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष नहीं होंगे। कोई भी व्यक्ति दो टर्म से अधिक अध्यक्ष नहीं होंगे। अध्यक्ष का कार्यकाल पदभार ग्रहण की तिथि से तीन वर्षों का होगा, लेकिन कदाचार में दोषी पाये जाने पर राज्य सरकार उन्हें बीच में भी हटा सकेगी। बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग से हो सकेगी। चतुर्थ श्रेणी के सृजित पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से सेवा ली जाएगी।

नियमावली के मुताबिक अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाने हेतु कोई व्यक्ति तब तक योग्य नहीं समझा जाएगा, जब तक कि वह केंद्र या राज्य सरकार के अधीन पर्याप्त प्रशासनिक अनुभव न रखता हो अथवा वह स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा प्रदान करने वाली शैक्षणिक संस्था में न्यूनतम दस वर्षों का शिक्षण अथवा शोध का अनुभव न रखता हो अथवा जो अरबी, फारसी, इस्लामिक अध्ययन में ख्याति प्राप्त विद्वान न हो और मदरसा शिक्षा में अभिरुचि न रखता हो।
अध्यक्ष की अस्थायी अनुपस्थिति के दौरान प्राच्य शिक्षा निदेशक प्रभार में रहेंगे। अध्यक्ष तीन माह में कम-से-कम एक बार बोर्ड की बैठक बुलाएंगे। बिहार शिक्षा सेवा के अधिकारी बोर्ड के सचिव होंगे। नियमावली में अध्यक्ष एवं सचिव के साथ ही परीक्षा नियंत्रक की शक्तियों का भी निर्धारण किया गया है।
मदरसों की संबद्धता स्वीकृत करने, विभाग के अनुमोदन के पश्चात इस संबंध में नियमावली बनाने तथा प्रस्वीकृति के लिए निर्धारित मानक पूरा नहीं करने पर प्रस्वीकृति वापस लेने की शक्ति भी नियमावली में बोर्ड को दी गई है। मदरसों को अनुदान की श्रेणी में लाने के लिए अनुशंसा के अधिकार भी बोर्ड को दिए गए हैं।


