बीआरएबीयू में 200 छात्रों पर एक शिक्षक पढ़ा रहे हैं। बीआरएबीयू के कई कॉलेजों में एक ही शिक्षक के भरोसे संबंधित विषय की सारी कक्षाएं चल रही हैं। विषय के शिक्षक पढ़ाते भी हैं और विभागाध्यक्ष भी हैं। स्नातक के अलावा पीजी विभागों में भी एक से दो शिक्षक ही 150 से 200 छात्रों को पढ़ाते हैं। यूजीसी से विश्वविद्यालयों को भेजे दिशा-निर्देश के मुताबिक सभी कॉलेजों में 30 छात्र पर एक शिक्षक होने चाहिए। बीआरएबीयू में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है।
आरबीबीएम कॉलेज में हिन्दी विभाग में एक ही शिक्षिका डॉ. सोनल हैं। स्नातक के तीनों पार्ट में वे ही पढ़ाती हैं। तीनों वर्ष मिलाकर 250 छात्र हैं। पीजी अर्थशास्त्र विभाग में भी एक ही शिक्षक पढ़ा रहे हैं। दोनों जगह पढ़ाने वाले शिक्षक विभागाध्यक्ष का काम भी करते हैं। एमडीडीएम कॉलेज के फिजिक्स विभाग में एक शिक्षक हैं। फिजिक्स की शिक्षक इंटर से लेकर स्नातक और पीजी तक पढ़ाती हैं। एक शिक्षक के भरोसे 500 छात्रों की जिम्मेदारी है। एमपी सिन्हा साइंस कॉलेज में संस्कृत अर्थशास्त्र और फिलॉस्फी में एक ही शिक्षक हैं। बीआरएबीयू के रजिस्ट्रार प्रो. राम कृष्ण ठाकुर ने बताया कि जल्द ही और अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति होगी जिससे शिक्षकों की कमी दूर होगी।
सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में भी ऐसा ही अनुपात
राज्य के दूसरे विश्वविद्यालयों में भी यही हाल है। तिलकामांझी भागलपुर विवि के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. योगेंद्र का कहना है कि उनके विभाग में तीन ही शिक्षक हैं और छात्र 360 हैं। कोसी कॉलेज में फिजिक्स विभाग में एक भी शिक्षक नहीं हैं। 2009 में रेशनलाइजेशन के बाद सरकार ने पद घटाया पर छात्रों की संख्या कम नहीं | हुई। पाटलीपुत्र विवि के नालंदा कॉलेज के राजनीति विज्ञान के डॉ. विनीत लाल ने बताया कि उनके यहां स्नातक में 450 छात्र हैं और शिक्षक तीन हैं ।

मिथिला विवि में 1500 छात्रों के लिए छह शिक्षक
ललित नारायण मिथिला विवि के सीएम कॉलेज में स्नातक इतिहास में 1500 छात्र है और यहां शिक्षक सिर्फ छह हैं। शिक्षक प्रो. मुकेश कुमार ने बताया कि एक शिक्षक के जिम्मे 250 छात्र हैं। जेपी विवि छपरा के परसा कॉलेज में अर्थशास्त्र की शिक्षिका डॉ. अनीता ने बताया कि अपने विषय में वह अकेली शिक्षिका हैं और छात्र 197 हैं। मगध विवि के सतेंद्र नारायण सिन्हा कॉलेज ‘जहानाबाद के अंग्रेजी के शिक्षक प्रो. सुबोध कुमार झा ने बताया कि इंटर से लेकर स्नातक के लिए वह ही हैं।




