वाह रे बिहार पुलिस, ह’त्या के आ’रोपी फ’रार लेकिन ने’त्रहीन, दि’व्यांगों को भी बना दिया जानलेवा ह’मले का अभियुक्त

गोपालगंज. अपने कारनामों को लेकर समय-समय पर सुर्खियों में रहने वाली बिहार पुलिस एक बार फिर से चर्चा में है. मामला गोपालगंज के बहुचर्चित अंकित हत्याकांड से जुड़ा है जिसमें पुलिस का एक और कारनामा उजागर हुआ है. पुलिस ने हत्या के बाद हुए बवाल मामले में 39 नामजद और 211 अज्ञात लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज किया है लेकिन आश्चर्य ये है कि आरोपियों में नेत्रहीन, दिव्यांग और बुजुर्ग महादलित परिवार के सदस्य भी शामिल हैं, जो खुद को निर्दोष बता रहे हैं और सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं.नेत्रहीन, दिव्यांग और बुजुर्गों ने खुद को अभियुक्त बनाये जाने पर साजिशन एकतरफा कार्रवाई का आरोप पुलिस पर लगाया है. पीड़ितों ने सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर गुहार लगाई है. बसडीला के इन आरोपियों में कोई नेत्रहीन है, तो कोई पैरों से लाचार दिव्यांग है, तो कोई बुजुर्ग लेकिन पुलिस की नजरों ये सभी लोग मुजरिम हैं. आरोप है कि 27 जनवरी को बसडीला मस्जिद के पास हुई अंकित की हत्या के बाद 28 जनवरी की सुबह बवाल हुआ और लोगों ने पुलिस पर पथराव कर जानलेवा हमला कर दिया. पुलिस ने इन्ही मामलों में नेत्रहीन सरली देवी, फुलकुमारी देवी, राधा बासफोर समेत 39 लोगों के विरुद्ध प्राथकमिकी दर्ज की है.

पुलिस ने जिन लोगों को जानलेवा हमले का आरोपी बनाया है, उनमें सरली देवी एक ऐसी महिला है, जो दोनों आंखों से देख नहीं सकती है और कानों से सुन नहीं सकती. सरली देवी को चलने के लिए भी बैशाखी का सहारा लेना पड़ता है, ऐसे में सवाल यै है कि वो पुलिस पर जानलेवा हमला कैसे कर सकती है. राधा बासफोर और फुलकुमारी देवी दोनों विद्यालय में साफ-सफाई का काम करतीं हैं. घटना के दिन दोनों विद्यालय में ड्यूटी पर थीं, लेकिन पुलिस ने इनका भी नाम पथराव और जानलेवा हमला करने के एफआईआर में डाल दिया है.

अधिकांश महादलित परिवार को ही पुलिस ने अभियुक्त बनाया है, जिनसे इस घटना से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. पुलिस को अभी भी यकीन नहीं है कि आरोपी दिव्यांग और नेत्रहीन हैं, जो हमला नहीं कर सकते. सदर एसडीपीओ संजीव कुमार की ओर से अनुसंधान की बातें कही जा रही हैं, वहीं बीजेपी के नेता और पूर्व मंत्री जनक राम भी इस पर सवाल उठा रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि न्याय मांगने वालों पर पुलिस द्वारा लाठी चलाई गयी और फिर गोली चलाने के बाद एफआइआर दर्ज कराकर उन्हें डर और भय के बीच जीने को मजबूर किया जा रहा है. जनक राम ने पुलिस कार्रवाई को बिहार में तालीबानी कानून करार दिया है.

 

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