नीतीश कुमार की चाल से जुदा कांग्रेस की अलग राह, विपक्षी एकता की मुहिम की निकली हवा!

पटना: राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विपक्षी एकता की मुहिम को ग्रहण लग गया है। इस विपक्षी एकता मुहिम को विफल करने का प्रयास तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने किया। बची खुची कसर कांग्रेस ने नीतीश कुमार की लगातार लगाई जा रही गुहार को अनसुनी कर दी। एक तरह से कांग्रेस ने नीतीश की बची खुची उम्मीद भी धव्स्त कर दी। विपक्षी एकता की मुहिम पर सबसे पहला प्रहार के सी आर ने किया।nitish lalu soniaखुद को राष्ट्रीय शक्ति बताते भाजपा की चुनौती देते रैली भी कर ली।इस रैली में तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने शक्ति प्रदर्शन किया। रैली में मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की उपस्थिति में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और सी पी आई के महासचिव डी. राजा ने शामिल हो कर नमो के विरुद्ध गोलबंदी का एक बड़ा मंच देश के सामने रख डाला। कर एक अलग ध्रुवीकरण का संकेत दे डाला। साथ ही चार राज्यों के नेताओं ने केसीआर का नारा लगाकर नीतीश कुमार के पीएम बनने के सपने पर पहला कुठाराघात भी कर डाला।

वन फ्रंट की मुहिम से कांग्रेस की भी ना

केसीआर के बदले रुख के बाद नीतीश कुमार का विपक्षी एकता अभियान की आस कांग्रेस से लग गई। मगर इस उम्मीद को कोई आवाज मिलते नहीं दिखी तो नीतीश कुमार ने देश के सामने कांग्रेस के चेहरे को जनता के सामने रखने की एक रणनीति अपनाई। इसके तहत भाकपा माले के मंच का उपयोग करते उन्होंने ये कहते हुए कांग्रेस को आवाज दी कि मेरी आवाज राहुल गांधी तक नहीं जा रही है और यहां तक की कांग्रेस युक्त वन फ्रंट पर भी कोई प्रतिक्रिया भी नहीं आ रही। लेकिन एक संवाददाता सम्मेलन के जरिए जयराम रमेश और के सी वेणुगोपाल ने साफ कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ विपक्ष का साझा उम्मीदवार खड़ा करने की कोई संभावना नहीं है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

राजनीतिक विशेषज्ञ डॉक आलोक पांडे कहते हैं कि ‘नीतीश कुमार के आग्रह को सी-वोटर और इंडिया टुडे के एक सर्वे के बरक्स देखने की जरूरत है। दरअसल इस सर्वे में बिहार की लोकसभा सीटों को लेकर एक सर्वे आया है। इस सर्वे में बीजेपी को बिहार में भारी नुकसान होता दिख रहा है।

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए बिहार में कमाल करता नजर आ रहा है। बिहार में यूपीए की सीटों में 2019 के मुकाबले 2024 में 25 गुना इजाफा होने की संभावना जताई गई है। बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 25 सीटें यूपीए के खाते में जाती दिख रही हैं।’ डॉ आलोक पांडे के मुताबिक ‘मेरा अनुमान है कि इस सर्वे के आलोक में नीतीश कुमार कांग्रेस को विपक्षी एकता की मुहिम हेतु साधने में जुटे हैं।’

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