पिता और चाचा ने अपनी सांस देकर बचाई लाडले की जान, मुंह से देते रहे ऑक्सीजन, अस्पतालकर्मियों ने किया सलाम!

आरा. इसमें कोई शक नहीं कि पिता और बेटे के बीच मे बेहद ही खास रिश्ता होता है. कहते हैं कि पिता का सबसे करीबी दोस्त उसका बेटा ही होता है. हालांकि, आजकल की बिजी लाइफ के कारण पिता-बेटे एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार को जाहिर नहीं कर पाते.

आरा में बेटे की जान बचाने के लिए पिता और चाचा ने अपनी सांस दी. लेकिन आरा से एक ऐसा तस्वीर सामने आई है जो पिता-बेटे के रिश्ते को और मजबूत करती नजर आ रही है. मामला शनिवार देर रात आरा सदर अस्पताल का है जहां बेटे की तबीयत ज्यादा बिगड़ती देख एक पिता ने अपने मुंह से ही उसे ऑक्सीजन देना शुरू कर दिया. पिता-बेटे के इस अटूट प्रेम को देख अस्पतालकर्मी भी भौंचक्के रह गए और बीमार युवक के इलाज में पूरी तरह से जुट गए, जिसके बाद युवक की जान बचाई जा सकी.

दरअसल, शनिवार को आरा शहर के भलूहीपुर मुहल्ला निवासी संतोष कुमार का 18 वर्षीय बेटा कृष्णा कुमार ने मोहल्ले के एक मंदिर में महाशिवरात्रि के मौके पर आयोजित भंडारे का भोजन किया था. बीमार युवक भंडारे का भोजन करने के बाद वापस अपने घर आया, लेकिन थोड़ी देर के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई. बेटे की तबीयत बिगड़ने पर पिता संतोष कुमार उसे आनन-फानन में इलाज के लिए लेकर आरा सदर अस्पताल पहुंचे.

इसी बीच बेटे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी. सदर अस्पताल के ओटी में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे तत्काल ऑक्सीजन मुहैया कराया, लेकिन तभी बीमार युवक के पिता ने बेटे की जान बचाने की खातिर उसे अपने मुंह से ऑक्सिजन देने लगा. इस वाकये को ओटी में मौजूद जिसने भी देखा उनकी आंखें नम हो गईं. बीमार बेटे ने जब तक सांस लेने में तकलीफ होने की बात कही तब तक पिता और चाचा उसे मुंह से ऑक्सीजन देते रहे.

हालांकि, इस बीच उसे ऑक्सीजन सिलिंडर की मदद से भी ऑक्सीजन दिया जा रहा था. तकरीबन 2 घंटों तक ऑक्सीजन देने और इमरजेंसी विभाग में तैनात डाक्टरों के इलाज के बाद उस बीमार बेटे की तबियत ठीक हो पाई. इस बीच युवक के पिता और चाचा काफी देर तक अपने बेटे के इलाज के लिए परेशान दिखे. इधर, सदर अस्पताल के इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने युवक की तबीयत बिगड़ने का कारण फ़ूड पॉइजनिंग बताया. बता दें कि बीमार युवक के पिता शहर के भलूहीपुर मुहल्ले में एक छोटी सी दुकान है.

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