पटना: बच्ची खेल रही थी। अचानक एक युवक आते ही थप्पड़ जड़ते हुए भद्दी भद्दी गालियां देता है। बच्ची की आंखों से आंसू टपकने लगते हैं, पर डर से वह रो भी नहीं पा रही। सोमवार को करीब ढाई बजे दिन में पटना जंक्शन परिसर स्थित महावीर मंदिर के पीछे का यह दृश्य है, जहां कुछ बच्चे खेल रहे थे। उस युवक ने उनमें सबसे बड़ी लड़की को तमाचा जड़ते हुए कहा, ‘एतना गड़िया चल गेलै, आ तू सब खेलित हे।’ इतनी गाड़ियां चली गईं और तुम लोग यहां खेल में मस्त हो। मतलब साफ था कि चिलचिलाती धूप में उन्हें भीख मांगने को लगाया गया था, पर वे बच्चे वहीं छांव की तलाश कर खेल रहे थे।
वह भैया कौन है? यह पूछने पर बच्चे ने चुप्पी साध ली। उसकी आंखों से लग रहा था कि या तो वह भय से बताना नहीं चाहता या उसे उसके बारे में पूरी जानकारी नहीं। इतना स्पष्ट हो गया कि इन सबका बास कोई भैया है, जिसे भीख मांगकर पैसे देना है। यदि कमाई नहीं हुई तो मार का डर। वह बच्ची यही सोचकर रो रही थी कि पैसे नहीं मिले तो फिर मार पड़ेगी। जिस बच्चे ने भैया के बारे में बताया, उसकी उम्र सात-आठ साल की रही होगी। उसे नोटों का अंतर तक नहीं पता था। उसने बताया कि भैया ही उसे और उसके जैसे अन्य पांच बच्चों को खाना-पानी देता है। वह कहां का रहनेवाला है, यह भी नहीं पता। वह केवल भैया को जानता है। उसने रोते हुए बताया कि ‘बीमारी आएल हलई, ओही समय से हियां भीख मंगते हई।’ बीमारी हुई थी, उसी समय से भीख मांग रहे हैं।
एक बच्चे ने बताया कि तबीयत खराब होने पर भी भैया उनलोगों को यहां भेजता है। जो नहीं आना चाहता, उसे खाना नहीं देता है और मारता भी है। उसे बातें करते देख दो-तीन और बच्चे आ गए। वे पूछने लगे कि क्या हुआ? जो बच्चा भैया के बारे में बता रहा था, उससे कहा कि ‘भैया देख लेतउ त मार के पटरा कर देतउ।’ मतलब यह कि भैया ने देख लिया तो मार मार के ठीक कर देगा। साफ हो चुका था कि भीख नहीं मांगने पर उन बच्चों की पिटाई भी होती है। उसकी बातें सुन वह बच्चा वहां से खिसक गया। जेपीओ गोलंबर से आर ब्लाक तक ओवरब्रिज के नीचे तक इन बच्चों को कितना भी डांटें-फटकारें, उन पर असर नहीं पड़ता। कई बच्चे तो शरीर से चिपक जाते हैं। उन्हें मार का डर है।
