खगड़िया में बनी फिल्म ‘प्रस्थान’ का अमेरिका में धूम, नेवादा फिल्म फेस्टिवल में चयनित

खगड़िया: कहानी में अगर दम है तो इसकी गूंज बिहार से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है.फिल्म की बजट, या कलाकार मायने नहीं रखता.फिल्म की कहानी और किरदार आपके दिल को छू जाए तो वो फिल्म सभी ऊंचाइयों को छू लेती है.खगड़िया जैसे छोटे शहर में बनी फिल्म अंतराष्ट्रीय प्लेटफार्म पर धूम मचा रही है.मात्र 7.5 लाख में बनी फिल्म ‘ प्रस्थान ‘ जिसमे स्थानीय कलाकारों और निर्देशक ने काम किया, वो अमेरिका के नेवादा फिल्म फेस्टिवल में चयनित हुई है. इससे पहले ये फिल्म कनाडा के टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में भी चयनित हो चुकी है. ये खगड़िया वासियों के लिए बड़ी ही गौरव की बात है.

खगड़िया में बनी फिल्म 'प्रस्थान' का अमेरिका में धूम, नेवादा फिल्म फेस्टिवल  में चयनित - Film prasthan made in khagaria made a splash in america  selected in nevada film festival – News18 ...फिल्म के निर्देशक सह लेखक टी पी जालान ने बताया कि इस फिल्म में एक बूढ़ा किरदार है कोच वान अली.उसकीपीड़ा को दिखाया गया है. वो अपनी बेटी रुकसाना की चिट्ठी की चाहत में रोज पोस्ट ऑफिस के चक्कर काटता है. लेकिन पोस्टमास्टर उसे दुत्कार कर भगा देता है.कोच वान अली जवानी में शिकारी था.जब वो अपने बेटी से दूर हो जाता है. तब उसे उन जानवरों के परिवार के पीड़ा का एहसास होता है.उसके बाद से वोप्राकृति प्रेमी हो जाता है.पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टर की एक बेटी है, जो गांव में बीमार है. लेकिन वो अपने बेटी से फोन पर बात नहीं कर पाता है.

क्या है इस फिल्म की कहानी
तब उसे एहसास होता है कि अपने अहम के कारण उसने कोच वान अली के साथ कितना गलत व्यवहार किया था.कोच वान अली भी थक हार कर पोस्ट ऑफिस आना छोड़ देता है. पोस्ट ऑफिस के क्लर्क से कहता है अगर खत आए तो मेरे कब्र पर पहुंचा देना.तब पोस्टमास्टर कहता है मैं भी खत पहुंचने जाऊंगा.तो फिल्म के निर्देशक बताते हैं कि इस फिल्म में चार प्रस्थान हैं.दो भौतिक प्रस्थान, एक कोच वान अली का अपने बेटी से दूर होना और दूसरा उसका बूढ़ा हो जानाऔर दो वैचारिक प्रस्थान है.एक जानवरों की पीड़ा को समझकर कोच वान अली का हृदय परिवर्तन और दूसरा है कोच वान अली की पीड़ा को समझकर पोस्टमास्टर का हृदय परिवर्तन.

कहां से मिली फिल्म बनाने की प्रेरणा
इस फिल्म के निर्देशक सह लेखक टी पी जालान पेशे से एक शिक्षक हैं और कई बार नाटक का निर्देशन भी कर चुके हैं.उन्होंने बताया कि ये फिल्म विख्यात लेखक धूमकेतु की कहानी ” द लेटर\” पर आधारित है.इस कहानी का उन्होंने अनुवाद किया था, जो एक लोकल मैगजीन में छपी थी.जिसके बाद लोगों ने उनकी काफी सराहना की और ये फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया.उन्होंने बताया कि इस फिल्म की शूटिंग खगड़िया में उनके विद्यालय और जिला मुख्यालय से छ किलोमीटर दूर गोविंदपुर आहो गांव में हुई थी.इसमें सभी स्थानीय कलाकारों ने काम किया था.

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