मधुबनी: माता सीता मिथिलांचल की ही बेटी थी, इसलिए मिथिलांचल में प्रभु श्रीराम को लोग दामाद के रूप में मानते हैं. मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड के फुल्हर गांव में आज भी एक पुष्प वाटिका है. कहा जाता है कि माता सीता यहां फूल तोड़ने के लिए आया करती थीं. यहां आज भी भगवान राम के तीन तीर प्रतीकात्मक रूप में मौजूद हैं. बताया जाता है कि यहां जो तीर है, वह कोई साधारण तीर नहीं, बल्कि रामायण कालीन भगवान श्रीराम के तीर हैं. ग्रामीणों के अनुसार वर्षों पूर्व प्रभु श्रीराम यहां आए थे. तब उन्होंने इस तीर को यहीं छोड़ दिया था. ये तीर नाग अस्त्र, इंद्र अस्त्र और अग्नि अस्त्र के प्रतीक हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि माता सीता यहां फूल तोड़ने के लिए आया करती थीं. यहीं पर जनकपुर जाते समय भगवान राम भी आए हुए थे. इस कारण से ही इस जगह का नाम पुष्प वाटिका हो पड़ गया.

इस पुष्प वाटिका में ठाकुरजी की कुटिया आज भी है, जहां साक्षात भगवान विष्णु के विराजमान होने की मान्यता है.

ग्रामीणों की मान्यता है कि इस पुष्प वाटिका में भगवान श्रीराम के चरण चिह्न आज भी विद्यमान हैं. यहां के लोग भगवान राम का चरण मानकर इसकी पूजा करते हैं.

कहा जाता है कि भगवान राम जब माता सीता स्वयंवर के लिए जनकपुर जा रहे थे, तो इसी रास्ते से गुरु विश्वामित्र के साथ गुजरे थे. यह रास्ता आज भी इस इलाके के लोगों के लिए पवित्र रास्ता माना जाता है.