सॉफ्टवेयर से आएगी स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति, एक क्लिक में पता चलेगी खतरनाक बीमारी

भागलपुर : भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान यानी  IIIT भागलपुर अपने नए नए आविष्कारों के लिए हमेशा चर्चा में रहता है. एक बार फिर IIIT भागलपुर सुर्खियों में है. क्योंकि यहां के प्रोफेसर्स ने ऐसे सॉफ्टवेयर को डेवलप किया जो आगे जाकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है. ट्रिपल आईटी के प्रोफेसर्स ने दो अलग-अलग सॉफ्टवेयर डिजाइन किया है. इनमें से एक सॉफ्टवेयर से कैंसर का पता लगाया जा सकेगा तो दूसरे सॉफ्टवेयर से टीबी के मरीजों की पहचान की जाएगी.

Software Engineer vs. Software Developer | Built Inटीबी के मरीजों की होगी पहचान

फैकल्टी संदीप कुमार ने टीबी के मरीजों की पहचान के लिए सॉफ्टवेयर बनाया है. इसमें मरीज के चेस्ट एक्सरे डालकर यह पता लगा लिया जाएगा कि वो टीबी के मरीज है या नहीं है. संदीप कुमार 2018 से ही इस एप्प पर काम कर रहे थे. सॉफ्टवेयर की मदद से फ़ोन या लैपटॉप से ही बीमारी पता लगाया जाएगा. ऐसे में टीबी के मरीजों की पहचान अब आसान हो जाएगी.

90 प्रतिशत सही रिजल्ट

वहीं, फैकल्टी चंदन झा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसा सॉफ्टवेयर डिजाइन किया है, जिससे कैंसर के मरीजों का पता लगाया जा सकेगा. ब्लड में इमेज एनालिसिस की मदद से ल्यूकेमिया डिटेक्शन पर काम कर किया जा रहा है. चंदन झा अभी प्रिलिमनरी लेवल पर AI की मदद से इसको डिटेक्ट करने पर शोध कर रहे हैं. अभी तक 90 प्रतिशत सही रिजल्ट मिल भी रहा है. चंदन झा का कहना है कि बहुत जल्द एक अच्छा एप्लीकेशन डेवलप हो जाएगा. जिससे कैंसर की बीमारी का आसानी से पता लगाया जा सकता है. इस सॉफ्टवेयर के तैयार हो जाने के बाद कैंसर का पता लगाने के लिए हमें डॉक्टर और जांच रिपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी.

नहीं काटने पड़ेंगे अस्पतालों के चक्कर

फिलहाल एप के अप्रूवल के लिए ICMR भेजा जाएगा. अगर अप्रूवल मिल गया तो वो दिन दूर नहीं जब एक क्लिक में बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा. इसके लिए ना तो मरीजों को अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ेंगे और ना ही टेस्ट के लिए हजारों और लाखों का खर्च करना पड़ेगा. दोनों एप से कैंसर मरीजों के इलाज में भी आसान हो पाएगी और 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में बेहद अहम भूमिका निभा सकती है.

 

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