बिहार: अब छात्राओं को माहवारी के कारण हर महीने तीन से चार दिन स्कूल नागा (अवकाश) नहीं होगा। स्कूल नहीं जाने के कारण पढ़ाई का नुकसान होता था। अब जल्द ही सारण के सभी मध्य एवं माध्यमिक विद्यालयों में सहेली कक्ष का निर्माण होने जा रहा है। यहां पीरियड के दौरान जरूरत पड़ने पर कुछ देर तक छात्राएं आराम करके फिर से क्लास कर सकेंगी। साथ ही वहां लगे सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन से जरूरत पड़ने पर सैनिटरी पैड भी ले सकेंगी। इतना ही नहीं छात्राओं के बीच जन्मदिन पर सैनिटरी पैड देने की परंपरा भी शुरू की जाएगी। इस संबंध में बिहार शिक्षा परियोजना निदेशक बी. कार्तिकेय धनजी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी कौशल किशोर एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समग्र शिक्षा अभियान धनंजय पासवान को पत्र भेजा है। इसमें सभी सरकारी विद्यालयों में बालिका स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सहेली कक्ष स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।
माहवारी एवं बालिका स्वास्थ्य पर होगी चर्चा
बालिका स्वास्थ्य और स्कूलों में बच्चियों की उपस्थिति बढ़ाने को लेकर यह पहल की गई है। बेटियों के जन्मदिन एवं अन्य विशिष्ट दिवस पर सैनिटरी पैड व साबुन देने की परंपरा विकसित की जाएगी। महिला विकास निगम, यूनिसेफ एवं जनप्रतिनिधियों का भी इसमें सहयोग लिया जाएगा। एक महीने के भीतर इस कक्ष का निर्माण कर विभाग को रिपोर्ट देने को कहां गया है। इसके लिए नोडल शिक्षिका भी स्कूलों में बनायी जाएंगी, जो हर सप्ताह इस कक्ष में बच्चियों के साथ कम से कम 30 मिनट की बैठक करेंगी, जिसमें उनके स्वास्थ्य और समस्याओं पर चर्चा होगी।सहेली कक्ष के द्वारा आपसी सहयोग से पैड बैंक का भी निर्माण किया जाएगा। बालिकाओं द्वारा ही इसके पैड का लेखा-संधारण का कार्य नोडल शिक्षिका के देख-रेख में किया जाएगा।

सहेली कक्ष में मिलेगी यह सुविधा
सहेली कक्ष में एक बिस्तर और कुर्सी के अलावा आपातकालीन यूनिफार्म (एक जोड़ी स्कर्ट), एक सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और अलग से सैनिटरी पैड का रिजर्व स्टाक रहेगा। साथ ही, इस्तेमाल किये गये पैड के सुरक्षित निपटान के लिए एक इलेक्ट्रिक इंसीनरेटर (पैड भस्मक) की भी व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त माहवारी से जुड़ी सामान्य समस्याओं और उनसे निपटने के प्रभावी तरीकों सहित पीरियड्स के दौरान उपयुक्त आहार व परहेज़ संबंधी विस्तृत जानकारियां कक्ष की दीवारों पर लिखी रहेंगी। दीवारों को माहवारी संबंधी सशक्त उदाहरण और पूरक चित्रों से सजाया जाएगा ताकि माहवारी के बारे में प्रचलित मिथकों और गलत धारणाओं को दूर किया जा सके।