बिहार : सूर्य के मकर राशि में प्रवेश होने साथ किया जाने वाला मकर संक्रांति पूजन इस बार 14 को नहीं बल्कि 15 जनवरी को होगा। यह जानकारी देते हुए बिहपुर के पंडित शंकर मिश्र व मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि मिथिला पंचाग के अनुसार 15 को मकर संक्रांति का पुण्यकाल है। मकर संक्राति पूजन के दौरान लोगों द्वारा घरों में अपने कुलदेवता को पूरे विधि विधान के साथ तिल व गुड़ चढ़ाया जाएगा। जिसके बाद भोग लगे तिल व गुड़ को परिवार के सदस्यों के बीच बांटकर ग्रहण करते हैं।

पंडित मृत्युंजय मिश्रा बताते हैं कि मकर संक्रांति पूजन को लेकर पुरातन काल से चली आ रही पूजन पद्धत्ति में आज भी कोई फेरबदल नहीं हुआ है। इस दिन गंगास्नान व दान काे भी बड़ा ही पुण्य फलदायी बताया गया है। वहीं मकर संक्राति पर पूरे भागलपुर अंगप्रदेश समेत गंगापार/नवगछिया अनुमंडल में भी लोग अपने परिवार व इष्टमित्रों के साथ दिन में जहां चूड़ा-दही,गुड़ व तिलकुट आदि खाते हैं। वहीं रात में खिचड़ी खाते हैं।
- मकर संक्रांति का पुण्यकाल – 07 बजकर 15 मिनट से लेकर 06 बजकर 21 मिनट तक है
- मकर संक्रांति महा पुण्यकाल – 07 बजकर 15 मिनट से लेकर 09 बजकर 06 मिनट तक है
मकर संक्रांति का महत्व क्या है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदी गंगा में स्नान करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस विशेष दिन पर ही गंगा मैया का धरती पर आगमन हुआ था। साथ ही इसी दिन से सूर्य देव उत्तरायण हो जाते हैं।