देश के सबसे लंबे सड़क पुल प्रोजेक्ट का बिल पास होते ही इस जिले में बढे जमीन के भाव

सुपौल. बिहार के अलग-अलग इलाकों में जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है वैसे-वैसे वहां की जमीन की कीमतों में भी काफी इजाफा देखने को मिल रहा है. बिहार के सुपौल जिले से भी कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आ रही है. दरअसल कोसी नदी पर मधुबनी के भेजा और सुपौल के बकौर के बीच देश का सबसे लंबा सड़क पुल बनने जा रहा है. अब ऐसे में इस पुल के बनने से आसपास के इलाकों में जमीन की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है.

A bridge is being constructed on the Kao river at a cost of two crore  rupees. | काव नदी पर निर्माणाधीन पुलिया निर्माण कार्य प्रगति पर: काव नदी पर  दो करोड़ रुपए

स्थानीय लोगों के अनुसार सुपौल में बकौर और भेजा के बीच बनने वाले पुल से जमीन की कीमतों में करीब 50 गुना तक वृद्धि हुई है. बताया जाता है कि कुछ साल पहले जिन जमीन की कीमतें एक लाख के भीतर थी. वहीं जमीन अब लाखों में बिकने लगी है. लगातार बढ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से एन 57 के किनारे की जमीन लाखों में पहुंच गयी है. वहीं हाल बकौर भेजा के बीच बनने वाली पुल के आस-पास की जमीनों का हो गया.

हजारों की जमीन अब लाखों में 

स्थानीय लोगों के अनुसार कभी जिन इलाकों धूल उड़ा करती थी और बारिश के दिनों में जलजमाव होता था. लोग जहां की जमीन हजारों में भी लेना मुनासिब नहीं समझते थे. वहां अब जमीन की कीमतें लाखों में पहुंच गयी हैं. स्थानीय पूर्व उप मुखिया अजय कुमार झा बताते हैं कि पुल की चर्चा होने से पहले इस इलाके में जमीन लेने वाला कोई नहीं था. लेकिन, अब सड़क किनारे की जमीन 30 से 45 लाख रुपए प्रति कट्ठा  बिकने लगी है. वहीं सड़क के थोड़ा अंदर वाले इलाके में भी जमीन भी 5 से 10 लाख रुपये प्रति कट्ठा बिक रही है.

जानें क्यों बढ़ने लगी जमीन की कीमतें

अजय कुमार झा बताते हैं कि जिस तरीके से एनएच 57 बनने के बाद सड़क किनारे की जमीनों के दाम भी आसमान छुने लगे थे ठीक उसी तरह बकौर से भेजा के बीच बन रहे पुल से विभिन्न इलाकों मे जाना आसान हो जाएगा, जिसकी वजह से पेट्रोल पंप, होटल के व्यवसाय करने के उद्येश्य से लोग यहां की जमीनों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार इस पुल के बनने के बाद यहां देश-विदेश के लोग आएंगे. ऐसे में बकौर-भेजा बाजार का भी विस्तार होगा. यही वजह है कि लोग अभी से ही यहां जमीन खरीदने में जुट गए हैं. दरअसल कोसी महासेतु और बलुआहा घाट के बीच की बड़ी आबादी को इस महासेतु से बहुत लाभ होगा.

बता दें, बकौर एवं मधुबनी जिले के भेजा के बीच बन रहे देश के सबसे लंबे (10.2 किलोमीटर) महासेतु के निर्माण तेजी से चल रहा है. केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से 1199 करोड़ 58 लाख रुपए की लागत से इस महासेतु का एप्रोच सहित निर्माण किया जा रहा है. इसमें 1051.3 करोड़ रुपए से केवल पुल का निर्माण कराया जा रहा है जिसे एक कार्य एजेंसी तैयार कर रही है. जिसमें गैमन इंजीनियर्स एंड कांक्ट्रेक्टर्स प्राईवेट लिमिटेड और मेसर्स ट्रांस रेल लाईटिंग प्राईवेट लिमिटेड (ज्वाईंट वेंचर )शामिल हैं. इस पुल के निर्माण को पूर्ण करने का अगस्त 2023 तक समय निर्धारित था, जिसे अब वर्ष 2024 के अंत पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अब तक पुल का 56 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. इसमें कुल 171 पाया होग, जिसके 166 पाए बन कर तैयार हो चुके हैं.

समझें कैसे होगा इलाके का विस्तार

बकौर-भेजा के बीच बनने वाले इस पुल के 25 किलोमीटर उत्तर में कोसी नदी पर कोसी महासेतु है तो 26 किलोमीटर दक्षिण में कोसी नदी पर ही बलुआहा घाट सेतु है. जिससे गाड़ियां आर-पार हो रही हैं. धारा बदलते रहने वाली कोसी नदी के स्वभाव के कारण इस महासेतु के माध्यम से कोसी तटबंध (पूर्वी और पश्चिमी) दोनो सिरे को जोड़ा जा रहा है. इस कारण से ही यह महासेतु अब देश का सबसे लंबा महासेतु बन जाएगा. अभी असम और अरुणाचल प्रदेश दो राज्यों को जोड़ने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी पर बनी सबसे लंबी महासेतु  भूपेन हजारिका सेतु की लंबाई 9.8 किलोमीटर है. बकौर-भेजा महासेतु के बनने के बाद दियारे (तटबंधों के बीच) में रहने वाली आबादी को ध्यान में रखते हुए महासेतु के दोनों तरफ दो बड़े-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे. इनसे गाड़ियां भी आर-पार हो सकेंगी. बीच में पड़ने वाले दियारा के पांच गांवों को इस तरफ से उस तरफ जाने के लिए रास्ता मिलेगा. समारिक दृष्टिकोण से महत्वपुर्ण इस पुल के निर्माण की वजह से लोगो के जमीन की कीमतें बढ़ गयी हैं.

सामरिक दृष्टिकोण से भी अहम

भारतमाला प्रोजेक्ट फेज-5 के तहत उच्चैठ स्थान उमगांव (मधुबनी) से महिषी उग्रतारा स्थान (सहरसा) के बीच बन रहे फोरलेन सड़क के एलाइनमेंट में यह पुल है. यह पुल सामरिक दृष्टिकोण से भी बहुत ही महत्वपूर्ण है. नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के साथ उत्तर-पूर्व के राज्यों को जुड़ने में यह कारगर सिद्ध होगा. इसके बन जाने के बाद बागडोगरा एयरपोर्ट पर जाना-आना काफी आसान हो जाएगा. इसके बनने के बाद मधुबनी और सुपौल जिला मुख्यालय की दूरी भी घट कर करीब 70 किलोमीटर रह जाएगी. इसके आगे यह सड़क परसरमा चौक के समीप सहरसा-सुपौल रोड में जुड़ेगी.सङक और पुल के निर्माण के साथ ही इलाके का विकास तेजी रफ्तार से होने लगेगा. बकौर, परसरमा और मधुबनी के भेजा के बीच कई नये व्यवसाय करने का लोगो को मौका मिलेगा.

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