पटना. बिहार में एनडीए की सरकार के बनने के बाद नीतीश कुमार को 12 फरवरी को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना है लेकिन उसके पहले तेजस्वी यादव के एक बयान ने बिहार के सियासी तापमान को पूरी तरह से गर्मा रखा है. दरअसल बिहार में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने दावा किया था कि खेल तो अभी शुरू हुआ है खेल अभी बाकी है, बस इसी बयान ने सियासी पारा गर्मा दिया है और दावों का खेल भी शुरू हो गया है.

तेजस्वी यादव के उस दावे के बाद इस बात को लेकर चर्चा तब और गर्म हो गई जब बिहार कांग्रेस के तमाम विधायक हैदराबाद शिफ्ट कर दिए गए जिसने इस चर्चा को और गर्म कर दिया क्योंकि कांग्रेस विधायकों को लेकर ये चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस विधायकों में टूट हो सकती है और विधायकों में टूट से बचाने के लिए कांग्रेस ने अपने विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट करा दिया.
खबर ये भी तेजी से उड़ रही है कि जदयू के कुछ विधायक भी आरजेडी के संपर्क में हैं, जिसकी चर्चा उस बात से तेज है जब तेजस्वी यादव ने कहा था कि खेल तो अभी शुरू हुआ है. जदयू विधायकों के टूट की खबर को नीतीश मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार ने जोरदार तरीके से खंडन करते हुए कहा कि जो लोग भी सपना देख रहे हैं वो नीतीश कुमार को नहीं जानते हैं. एनडीए के विधायक पूरी तरह से एकजुट हैं और जब 12 फरवरी को शक्ति परीक्षण होगा तो सारी तस्वीर साफ ही नहीं होगी बल्कि कुछ नया भी देखने को मिलेगा.
इस बीच पूर्व केंद्रीय मन्त्री और RLJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने भी बड़ा दावा किया है और कहा कि कांग्रेस और राजद के कई नेता, विधायक एनडीए के संपर्क में हैं. पहले आरजेडी अपने घर को संभाल ले. एनडीए में किसी तरह की कोई टूट नहीं होगी. इस बीच बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि बिहार विधान सभा के अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को नैतिकता के नाम पर इस्तीफ़ा दे देना चाहिए क्योंकि अब उनकी सरकार नहीं रही और ना ही उनके पास संख्या बल है. उनके खिलाफ एनडीए ने अविश्वास प्रस्ताव लाया हुआ है और ऐसे में उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए